8 दिसंबर 2025 को असम के होजाई जिले में एक यात्री ट्रेन रेलवे ट्रैक पार कर रहे हाथियों के झुंड से टकरा गई, जिससे सात हाथियों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हुआ। तड़के सुबह हुई इस घटना ने पूर्वोत्तर भारत में रेलवे विस्तार और वन्यजीव गलियारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गंभीर संघर्ष को फिर रेखांकित किया। असम में भारत के जंगली एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी (5,000 से अधिक) पाई जाती है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के आंकड़े बताते हैं कि ट्रेन टक्करें असम, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में हाथियों की मौत के प्रमुख कारणों में से एक हैं। सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने पहले रेल मंत्रालय को चिन्हित वन्यजीव गलियारों में गति सीमा कम करने, सेंसर एवं अलर्ट सिस्टम लगाने और वन विभागों से समन्वय के निर्देश दिए थे। संरक्षणवादियों ने वन संरक्षण अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सभी रेलवे विस्तार परियोजनाओं के लिए अनिवार्य पर्यावरण प्रभाव आकलन की माँग फिर उठाई।