यह परियोजना राजस्थान के क्षेत्रीय विकास और भारत की ऊर्जा नीति — दोनों के लिए परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा में इस परियोजना की आधारशिला रखी। यह परियोजना अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड के तहत विकसित हो रही है, जिसमें भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम और एनटीपीसी की संयुक्त भागीदारी है। परीक्षा में इससे केंद्र-राज्य विकास परियोजनाओं, स्वच्छ ऊर्जा, परमाणु तकनीक और बांसवाड़ा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्न बन सकते हैं।
परियोजना में 700 मेगावाट क्षमता वाली चार स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर इकाइयां लगाई जानी हैं। कुल स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी। परियोजना स्थल बांसवाड़ा जिले में 1,366 एकड़ भूमि पर फैला है और पूरा होने का लक्ष्य 2036 तक बताया गया है। आधिकारिक विवरण में परियोजना की लागत लगभग ₹42,000 करोड़ दी गई है। तैयारी में इसी आधिकारिक लागत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस परियोजना का महत्व सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह बेस-लोड बिजली, स्वच्छ ऊर्जा ढांचे, स्थानीय रोजगार और बांसवाड़ा क्षेत्र के विकास से जुड़ती है। प्रधानमंत्री के बांसवाड़ा कार्यक्रम में कुल ₹1,22,100 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ, जबकि माही-बांसवाड़ा परमाणु परियोजना उस बड़े पैकेज का ऊर्जा घटक थी।
स्टैटिक जीके से जोड़कर पढ़ें तो दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर भारत की स्वदेशी परमाणु तकनीक का अहम हिस्सा हैं। RAS और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, क्षमता, लागत, क्रियान्वयन एजेंसी और रिएक्टर प्रकार पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह परियोजना राजस्थान में ऊर्जा सुरक्षा, बांसवाड़ा क्षेत्र के विकास, स्वच्छ ऊर्जा और बड़े बुनियादी ढांचे में निवेश के उदाहरण के रूप में उपयोगी है।
