सुसुमु किटागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और ओमर एम. याघी (अमेरिका) को धातु-कार्बनिक ढाँचों (MOFs) के विकास के लिए 2025 का नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार दिया गया। यह एक नई तरह की आणविक संरचना है। इसमें धातु आयन ढाँचे के कोनों का काम करते हैं और कार्बनिक अणु उन्हें जोड़कर छिद्रयुक्त क्रिस्टलीय पदार्थ बनाते हैं।

इन ढाँचों के कई उपयोग हैं: रेगिस्तानी हवा से पानी जुटाना, कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ना, विषैली गैसों का भंडारण, रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उत्प्रेरण, पानी से प्रदूषक निकालना और हाइड्रोजन का भंडारण। इनकी संरचना ज़रूरत के अनुसार बदली जा सकती है, जिससे गैस भंडारण, उत्प्रेरण और पर्यावरण से प्रदूषक हटाने की तकनीकों में प्रगति हुई है। किटागावा (जन्म 1951, क्योटो विश्वविद्यालय), रॉबसन (जन्म 1937, मेलबर्न विश्वविद्यालय) और याघी (जन्म 1965, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले) इस क्षेत्र के अग्रणी हैं।