प्रकाशित: 8 अक्टूबर 2025NobelPrize.orgविज्ञान-प्रौद्योगिकी
2025 का नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार: धातु-कार्बनिक ढाँचों के विकास के लिए किटागावा, रॉबसन और याघी को मिला
सुसुमु किटागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और ओमर एम. याघी (अमेरिका) को धातु-कार्बनिक ढाँचों (MOFs) के विकास के लिए 2025 का नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार दिया गया। यह एक नई तरह की आणविक संरचना है। इसमें धातु आयन ढाँचे के कोनों का काम करते हैं और कार्बनिक अणु उन्हें जोड़कर छिद्रयुक्त क्रिस्टलीय पदार्थ बनाते हैं।
इन ढाँचों के कई उपयोग हैं: रेगिस्तानी हवा से पानी जुटाना, कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ना, विषैली गैसों का भंडारण, रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उत्प्रेरण, पानी से प्रदूषक निकालना और हाइड्रोजन का भंडारण। इनकी संरचना ज़रूरत के अनुसार बदली जा सकती है, जिससे गैस भंडारण, उत्प्रेरण और पर्यावरण से प्रदूषक हटाने की तकनीकों में प्रगति हुई है। किटागावा (जन्म 1951, क्योटो विश्वविद्यालय), रॉबसन (जन्म 1937, मेलबर्न विश्वविद्यालय) और याघी (जन्म 1965, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले) इस क्षेत्र के अग्रणी हैं।
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Tपर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन
Tपुरस्कार, प्रकाशन एवं लेखक
Tरसायन विज्ञान: परमाणु संरचना, धातु/अधातु, अयस्क/मिश्र धातु, अम्ल/क्षार/pH, औषधि, कीटनाशक, कार्बन यौगिक, ईंधन, रेडियोधर्मिता, हरित रसायन›
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जुड़ा प्रश्नआसान
2025 का नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार किसके विकास के लिए दिया गया?
व्याख्या · सही उत्तर D2025 का रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क के विकास के लिए दिया गया। ये धातु आयनों और कार्बनिक अणुओं से बने सरंध्र क्रिस्टलीय पदार्थ हैं, जिनका उपयोग गैस भंडारण, कार्बन कैप्चर, जल-संग्रह और उत्प्रेरण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 के नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार विजेताओं का परिचय क्या है?
2025 के नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार विजेता हैं: **सुसुमु किटागावा (जन्म 1951, क्योटो विश्वविद्यालय, जापान); रिचर्ड रॉबसन (जन्म 1937, मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया); ओमर एम. याघी (जन्म 1965, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, अमेरिका, जॉर्डन में जन्मे)।** इन वैज्ञानिकों ने धातु-कार्बनिक ढाँचों (MOFs) के क्षेत्र में अग्रणी काम किया।
धातु-कार्बनिक ढाँचे की संरचना को ज़रूरत के अनुसार बदलने की क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?
**ऐसे धातु-कार्बनिक ढाँचों की संरचना को ज़रूरत के अनुसार बदला जा सकता है।** वैज्ञानिक किसी खास उपयोग के लिए इनके छिद्रों का आकार और रासायनिक गुण तय कर सकते हैं। इसी कारण ये ढाँचे कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ने, दवा पहुँचाने और हाइड्रोजन का भंडारण करने जैसे कई कामों के लिए उपयोगी हैं।
क्या धातु-कार्बनिक ढाँचे पानी से प्रदूषक निकाल सकते हैं?
हाँ, **धातु-कार्बनिक ढाँचे पानी से प्रदूषक निकाल सकते हैं।** इनमें पर- और पॉलीफ्लुओरोऐल्किल पदार्थ (PFAS), यानी लंबे समय तक नष्ट न होने वाले रसायन, तथा अन्य दूषित पदार्थ शामिल हैं। रेगिस्तानी हवा से पानी जुटाने और कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ने के साथ यह भी 2025 के नोबेल रसायन विज्ञान पुरस्कार से जुड़े शोध का एक प्रमुख उपयोग है।
अब तक कितने अलग-अलग धातु-कार्बनिक ढाँचे बनाए जा चुके हैं?
**अब तक 1,00,000 से अधिक अलग-अलग धातु-कार्बनिक ढाँचे बनाए जा चुके हैं,** और AI ने ऐसे हज़ारों अन्य ढाँचों के होने का अनुमान लगाया है। इतनी बड़ी संख्या इसलिए संभव है क्योंकि इनकी संरचना को ज़रूरत के अनुसार बदला जा सकता है। इससे वैज्ञानिक ऊर्जा, पर्यावरण और चिकित्सा में खास उपयोगों के लिए अलग-अलग पदार्थ तैयार कर सकते हैं।
धातु-कार्बनिक ढाँचों के विकास में रिचर्ड रॉबसन का क्या योगदान था?
**मेलबर्न विश्वविद्यालय में रिचर्ड रॉबसन ने 1989 में दिखाया कि धातु आयन और कार्बनिक संयोजक मिलकर विस्तृत छिद्रयुक्त ढाँचे बना सकते हैं।** उनके बुनियादी काम ने साबित किया कि इन क्रिस्टलीय ढाँचों को तय तरीके से बनाया जा सकता है और इसी ने किटागावा तथा याघी के आगे के काम की नींव रखी।