दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार ने दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026-2030 का मसौदा जारी किया है, जो 10 मई 2026 तक सार्वजनिक परामर्श के लिए उपलब्ध रहेगा। 11 अप्रैल 2026 को घोषित और 12 अप्रैल को व्यापक चर्चा में आया यह मसौदा दिल्ली ईवी नीति 2020 की जगह लेने वाली नई नीति है; दिल्ली ईवी नीति 2020 अगस्त 2023 में समाप्त हो गई थी और उसे कई बार बढ़ाया गया था। नई नीति 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक की कीमत वाली बैटरी इलेक्ट्रिक कारों पर सड़क कर और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट का प्रस्ताव रखती है, जो 31 मार्च 2030 तक दिल्ली में पंजीकृत वाहनों पर लागू होगी। 30 लाख रुपये से कम कीमत वाले स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क कर एवं पंजीकरण शुल्क में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी—इस प्रावधान का टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा विरोध कर रहे हैं, जिनका तर्क है कि हाइब्रिड को प्रोत्साहन देने से शुद्ध बैटरी ईवी अपनाने की गति धीमी हो सकती है। नीति में इलेक्ट्रिक कारों के लिए 1 लाख रुपये तक की खरीद सब्सिडी, तथा इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया एवं माल वाहनों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रस्तावित हैं। वायु गुणवत्ता सुधारने के एक बड़े कदम के रूप में 2028 तक नए पेट्रोल दोपहिया पंजीकरण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव है, क्योंकि दिल्ली के वाहनजनित प्रदूषण में दोपहिया वाहनों का योगदान सबसे अधिक माना गया है। नीति में उद्धृत VAHAN आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ईवी बिक्री साल-दर-साल 84 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2,00,000 इकाइयों तक पहुँच गई, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड 35 प्रतिशत बढ़कर 1,12,000 इकाइयों तक पहुँचे। यह मसौदा भारत को स्वच्छ शहरी परिवहन की ओर ले जाने और दिल्ली की विषाक्त शीत ऋतु वायु से निपटने में मदद के लिए तैयार किया गया है।