प्रकाशित: 6 मार्च 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
बैंक ऑफ बड़ौदा ने भारत के पहले घरेलू ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से ₹10,000 करोड़ जुटाए
बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने 7 मार्च 2026 को अपने सीरीज I दीर्घकालिक ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से ₹10,000 करोड़ जुटाए। इसके साथ वह घरेलू ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड जारी करने वाला पहला भारतीय बैंक बन गया। 7.10% कूपन दर और 7 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले इस बॉन्ड इश्यू को ₹16,415 करोड़ की बोलियां मिलीं — यानी मूल इश्यू आकार से 1.6 गुना से अधिक।
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड ऐसे ऋण साधन हैं जिनसे जुटाई गई राशि नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, हरित इमारतों, जल प्रबंधन और प्रदूषण रोकथाम जैसी पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए रखी जाती है। यह इश्यू RBI के सतत वित्त ढांचे और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
राजस्थान के लिए, जो राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 और RRECL के तहत सौर और पवन ऊर्जा हब के रूप में उभरा है, ग्रीन बॉन्ड वित्तपोषण स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना में संस्थागत पूंजी लाने का बड़ा अवसर है।
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बैंक ऑफ बड़ौदा ने भारत के पहले घरेलू किस प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से 10,000 करोड़ रुपये जुटाए?
व्याख्या · सही उत्तर Aबैंक ऑफ बड़ौदा ने भारत के पहले घरेलू ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से 10,000 करोड़ रुपये जुटाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मार्च 2026 में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा जारी ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड क्या खास है?
7 मार्च 2026 को बैंक ऑफ बड़ौदा का ₹10,000 करोड़ का बॉन्ड इश्यू भारत का पहला घरेलू ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड है। इस पर 7 वर्ष की अवधि में 7.10% कूपन दर है और इसे SEBI के ग्रीन डेट सिक्योरिटी ढांचे के तहत वर्गीकृत किया गया है — RBI दिशानिर्देशों के तहत जारी ग्रीन बॉन्ड से अलग।
बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड इश्यू पर बाजार की क्या प्रतिक्रिया रही?
इस इश्यू के लिए बाजार में मजबूत मांग दिखी — ₹10,000 करोड़ के इश्यू के मुकाबले ₹16,415 करोड़ की बोलियां आईं, यानी 1.64 गुना अभिदान मिला। यह मजबूत प्रतिक्रिया भारत के हरित वित्त साधनों में निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड से प्राप्त राशि किन परियोजनाओं में उपयोग होगी?
इससे प्राप्त राशि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, टिकाऊ जल प्रबंधन और हरित परिवहन बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में लगाई जाएगी। ये भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने और 2070 तक नेट-जीरो हासिल करने की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।
भारत में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड और सामान्य ग्रीन बॉन्ड में क्या अंतर है?
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड को बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए विशेष रूप से SEBI के ग्रीन डेट सिक्योरिटी ढांचे के तहत वर्गीकृत किया जाता है, जबकि सामान्य ग्रीन बॉन्ड RBI दिशानिर्देशों के तहत आते हैं। SEBI का वर्गीकरण बैंकों को नियामकीय लाभ देते हुए हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक पूंजी जुटाने में मदद करता है।
भारत की नेट-जीरो 2070 प्रतिबद्धता से ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड कैसे जुड़े हैं?
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवहन और टिकाऊ जल परियोजनाओं के लिए आवश्यक दीर्घकालिक पूंजी प्रदान करते हैं, जो इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद अहम हैं। इसलिए बैंक ऑफ बड़ौदा का यह इश्यू भारत की सतत वित्त यात्रा में एक मील का पत्थर है।