संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) ने भारत में सड़क सुरक्षा के सतत वित्तपोषण की परियोजना शुरू की है। यह परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), UNICEF और Save LIFE Foundation के सहयोग से चलाई जा रही है। चार पायलट राज्यों — राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम — में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए संस्थागत वित्तपोषण ढाँचा तैयार किया जाएगा।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति अत्यंत गंभीर है। हर साल लगभग 1.7 लाख लोग सड़क हादसों में जान गँवाते हैं, जो विश्व में सबसे अधिक आँकड़ों में से एक है। आर्थिक दृष्टि से इससे हर साल भारत के GDP का लगभग 3% नुकसान होता है। मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति जैसे कानून होने के बावजूद, संसाधनों की कमी और कार्यान्वयन की खामियाँ बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
UNRSF परियोजना का लक्ष्य है कि राज्यों में स्थायी वित्तपोषण मॉडल तैयार हों — जैसे उपयोगकर्ता शुल्क, दुर्घटना उपकर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी — ताकि सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए नियमित राजस्व सुनिश्चित हो सके।
राजस्थान का चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ विशाल सड़क नेटवर्क है — NH 48 (दिल्ली–मुंबई कॉरिडोर), NH 27 और राजकीय राजमार्गों पर तेज रफ्तार, कोहरा और अपर्याप्त संकेतकों के कारण हादसे अधिक होते हैं। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की मृत्यु दर भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र के सड़क सुरक्षा कार्रवाई दशक 2021–2030 के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटना मृत्यु दर को 50% घटाना है।
