राजस्व विभाग और वित्त मंत्रालय के अधीन केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने ऑपरेशन वज्र के तहत ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड की 12 करोड़ तेज़ असर वाली गोलियों की निर्यात खेप पकड़ी। प्रत्येक गोली की मात्रा 250 मिग्रा थी और पूरी खेप का वज़न लगभग 30 मीट्रिक टन, यानी 30,000 किलोग्राम था। यह पूरी खेप दिल्ली के एक गोदाम से जब्त की गई।

कागज़ों में खेप का गंतव्य गिनी-बिसाऊ बताया गया था, लेकिन शुरुआती जांच में इसके लीबिया भेजे जाने की बात सामने आई। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की जोखिम आधारित निर्यात नियंत्रण व्यवस्था ने कई संदिग्ध संकेत पकड़े। इसके बाद ब्यूरो ने अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण बोर्ड और गिनी-बिसाऊ के संबंधित अधिकारियों के साथ जांच की। इस तालमेल से पुष्टि हुई कि घोषित गंतव्य गलत था और खेप को दूसरी ओर भेजने की कोशिश की जा रही थी।

ग्वालियर के निरोधक दस्तों ने 10 से 20 जुलाई 2026 के बीच बेंगलुरु, दिल्ली और कोच्चि में यह अभियान चलाया। राजस्व आसूचना निदेशालय की बेंगलुरु और कोच्चि इकाइयों सहित दूसरी एजेंसियों ने भी सहयोग किया। बेंगलुरु की एक सीमित दायित्व भागीदारी फर्म के निदेशक को स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की संबंधित धाराओं में गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में मुख्य साजिशकर्ताओं के केरल से काम करने की बात सामने आई और दो अन्य लोगों को कोच्चि से पकड़ा गया। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी इसी अधिनियम के तहत हुई; जांच जारी है।

इस कार्रवाई ने कृत्रिम ओपिओइड दवाओं की बड़ी खेप को सक्रिय संघर्ष वाले क्षेत्रों तक पहुंचने से रोका। यह मामला दवा आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा और सीमापार संगठित नशीली दवा तस्करी रोकने में जोखिम आधारित पहचान, खुफिया जानकारी साझा करने, राष्ट्रीय एजेंसियों के तालमेल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहमियत दिखाता है।