दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में इंडिगो को बड़े परिचालन संकट का सामना करना पड़ा। 3-5 दिसंबर 2025 के दौरान 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 उड़ानें देरी से चलीं। इसी शुरुआती दिसंबर अवधि में आठ दिनों में 5,000 से अधिक उड़ानें भी रद्द हुईं, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए। संकट के प्रमुख कारणों में प्रैट एंड व्हिटनी इंजनों के कारण विमानों का सेवा से बाहर रहना, उड़ान दल की ड्यूटी तय करने में दिक्कत और प्रतिकूल मौसम शामिल थे।

नागर विमानन महानिदेशालय ने इंडिगो प्रबंधन को तलब किया और प्रभावित यात्रियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया। परीक्षा की दृष्टि से यह घटना केवल एक एयरलाइन की समस्या नहीं है। यह भारत के विमानन क्षेत्र में एक ही एयरलाइन के प्रभुत्व, नियामकीय निगरानी और उपभोक्ता संरक्षण जैसे मुद्दों को जोड़ती है। इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 60% से अधिक बताई गई है, इसलिए एक बड़ी एयरलाइन की परिचालन गड़बड़ी का असर पूरे यात्री नेटवर्क और हवाई अड्डों पर दिख सकता है।

स्टैटिक जीके से जोड़कर देखें तो यह विषय नागरिक उड्डयन नियमन, एक ही एयरलाइन के प्रभुत्व, संकट प्रबंधन और हवाई अड्डा संचालन से जुड़ता है। 2019 में जेट एयरवेज के अंतिम दिनों से की गई तुलना यह संकेत देती है कि विमानन क्षेत्र में वित्तीय या परिचालन दबाव व्यापक असर डाल सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में संख्या, कारण और नियामक संस्था पूछी जा सकती है, जबकि मुख्य परीक्षा में प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता अधिकार और शासन क्षमता पर प्रश्न बन सकता है। RAS और UPSC तैयारी में इसे अर्थव्यवस्था और शासन, दोनों विषयों के उदाहरण के रूप में पढ़ना उपयोगी है।