नई दिल्ली में 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता आयोजित; खालिस्तान उग्रवाद और साइबर सुरक्षा पर चर्चा
Aसीधा उत्तर
27 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता में द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की समीक्षा हुई, जिसमें भारत ने खालिस्तान-समर्थक उग्रवाद, राजनयिक मिशनों की सुरक्षा, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध पर चिंता व्यक्त की।
मुख्य तथ्य
28 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता आयोजित हुई।
भारत ने खालिस्तान समर्थक उग्रवाद, भारतीय राजनयिक मिशनों को खतरा, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध पर चिंता व्यक्त की।
वार्ता भारत-UK 2021 व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढांचे के तहत होती है।
भारत और UK प्रत्यर्पण और आपराधिक कानून प्रवर्तन के लिए MLAT के तहत सहयोग करते हैं।
UK में बड़ा सिख प्रवासी समुदाय है; UK में खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियां दीर्घकालिक द्विपक्षीय चिंता रही हैं।
साइबर अपराध सहयोग में MLAT और बुडापेस्ट कन्वेंशन ढांचे के तहत डेटा साझा करना और संयुक्त जांच शामिल है।
27 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में 6वीं भारत-यूनाइटेड किंगडम गृह मामलों की वार्ता (HAD) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीमा प्रबंधन सचिव डॉ. राजेंद्र कुमार ने और UK प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व होम ऑफिस के द्वितीय स्थायी सचिव श्री साइमन रिडले ने किया।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की और इन प्रमुख क्षेत्रों को चिह्नित किया: आतंकवाद से मुकाबला (UK में खालिस्तान समर्थक उग्रवाद और भारत-विरोधी गतिविधियों पर विशेष ध्यान), संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध प्रवासन, आपराधिक न्याय सहयोग और साइबर सुरक्षा। भारत ने UK में भारतीय राजनयिक मिशनों और गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा में हुई चूक पर भी चिंता जताई। HAD, 2021 में स्थापित भारत-UK व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत एक संरचित तंत्र है।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 28 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 6वीं भारत-यूके गृह मामलों की वार्ता के परिणामों तथा व्यापक रणनीतिक साझेदारी ढांचे के भीतर उसके स्थान की पड़ताल कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
डॉ. राजेंद्र कुमार एवं साइमन रिडली के नेतृत्व में 28 फरवरी 2026 की नई दिल्ली वार्ता में खालिस्तान-समर्थक उग्रवाद पर विशेष ध्यान देते हुए आतंकवाद-रोधी सहयोग, संगठित अपराध, मादक तस्करी, अवैध प्रवास, साइबर सुरक्षा एवं राजनयिक मिशन सुरक्षा की समीक्षा की गई। 2021 व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत हुई इस वार्ता ने पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ भारत का द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग मजबूत किया।
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नई दिल्ली में 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता किस तिथि को आयोजित हुई?
व्याख्या · सही उत्तर A
गृह मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति के अनुसार 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता 27 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीमा प्रबंधन सचिव डॉ. राजेंद्र कुमार ने और UK प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह कार्यालय के सेकेंड परमानेंट सेक्रेटरी साइमन रिडली ने किया।
6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता में क्या चर्चा हुई?
28 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में हुई 6वीं भारत-UK गृह मामलों की वार्ता में भारत ने खालिस्तान-समर्थक उग्रवाद, भारतीय राजनयिक मिशनों को खतरा, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध पर चिंता जताई। दोनों देशों ने 2021 व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की।
भारत-UK की 2021 व्यापक रणनीतिक साझेदारी क्या है?
व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) 2021 में स्थापित हुई, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा में भारत-UK संबंधों को नई ऊंचाई देती है। गृह मामलों की वार्ता इसी ढांचे का एक संस्थागत तंत्र है, जो कानून प्रवर्तन और आंतरिक सुरक्षा पर नियमित संवाद सुनिश्चित करती है।
खालिस्तान उग्रवाद भारत-UK संबंधों में चिंता का विषय क्यों है?
UK में दुनिया के सबसे बड़े सिख प्रवासी समुदायों में से एक है और वहाँ से संचालित खालिस्तान-समर्थक अलगाववादी समूह भारतीय राजनयिक मिशनों को निशाना बनाते रहे हैं। भारत लंबे समय से इस मुद्दे पर द्विपक्षीय स्तर पर चिंता जताता आया है और ऐसी गतिविधियों पर अंकुश के लिए UK से सहयोग माँगता है।
MLAT क्या है और यह भारत-UK सुरक्षा सहयोग में कैसे मदद करता है?
MLAT यानी आपसी कानूनी सहायता संधि — यह दो देशों के बीच आपराधिक मामलों में सबूत साझा करने, प्रत्यर्पण और संयुक्त जांच के लिए बनी संधि है। भारत और UK इसी संधि के तहत साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और भगोड़े अपराधियों के मामलों में सहयोग करते हैं।
बुडापेस्ट कन्वेंशन क्या है और इसका भारत-UK साइबर अपराध सहयोग से क्या संबंध है?
बुडापेस्ट कन्वेंशन (2001) साइबर अपराध पर पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो डिजिटल साक्ष्यों को साझा करने में मदद करती है। भारत और UK, MLAT के साथ इसी ढांचे का उपयोग साइबर अपराध की जांच, डेटा साझा करने और अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के खिलाफ संयुक्त अभियानों में करते हैं।
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