प्रकाशित: 15 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
CAG-ICSSR की राज्यों के सार्वजनिक वित्त पर दूसरी संगोष्ठी: राजकोषीय संघवाद मुख्य विषय
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) ने संयुक्त रूप से 16 दिसम्बर 2025 को राज्यों के सार्वजनिक वित्त पर दूसरी संगोष्ठी आयोजित की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता CAG संजय मूर्ति ने की। इसमें प्रमुख अर्थशास्त्री, नीति निर्माता और शोधकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार के वित्त, राजकोषीय संघवाद और भारत में उप-राष्ट्रीय राजकोषीय प्रणालियों की स्थिति पर विचार-विमर्श किया।
संगोष्ठी में कई महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें राज्यों का बढ़ता ऋण बोझ, ऑफ-बैलेंस-शीट उधारी, पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता और राजस्व घाटे का सामाजिक क्षेत्र के खर्च पर प्रभाव शामिल हैं। राजकोषीय संघवाद — यानी केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय शक्तियों और जिम्मेदारियों का विभाजन — मुख्य विषयों में से एक था।
राजस्थान को देश के उच्च राजकोषीय घाटे वाले राज्यों में से एक के रूप में चिन्हित किया गया। राज्य का बजट राजस्व व्यय-प्रधान है, जिसमें पूंजी निर्माण सीमित है, और इसका ऋण-से-GSDP अनुपात राजकोषीय प्रबंधकों के लिए चिंता का विषय रहा है। संगोष्ठी में सार्वजनिक उद्यमों को दी गई राज्य गारंटी और उनसे जुड़ी आकस्मिक देनदारियों पर भी चर्चा हुई।
CAG भारतीय संविधान के अनुच्छेद 149-151 के तहत राज्य वित्त की ऑडिटिंग में संवैधानिक भूमिका निभाता है। पहली संगोष्ठी 2024 में आयोजित हुई थी।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: राज्यों के सार्वजनिक वित्त पर द्वितीय CAG-आईसीएसएसआर संगोष्ठी के विषयों तथा भारत के राजकोषीय संघीय ढाँचे में राजस्थान की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
16 दिसम्बर 2025 को CAG संजय मूर्ति की अध्यक्षता में सार्वजनिक वित्त पर द्वितीय CAG-आईसीएसएसआर संगोष्ठी में राज्य ऋण, बैलेंस-शीट से बाहर के उधार, राजस्व की कमी तथा 16वें वित्त आयोग ढाँचे पर विचार हुआ। राजस्थान उच्च राजकोषीय घाटे वाले राज्य के रूप में पहचाना गया। अनुच्छेद 149-151 के तहत CAG लेखापरीक्षा सहकारी राजकोषीय संघवाद को आधार देती है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्यों के सार्वजनिक वित्त पर दूसरी CAG-ICSSR संगोष्ठी की अध्यक्षता किसने की?
दूसरी संगोष्ठी की अध्यक्षता भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) संजय मूर्ति ने की और यह 16 दिसम्बर 2025 को आयोजित हुई।
राजकोषीय संघवाद क्या है और यह इस संगोष्ठी का मुख्य विषय क्यों था?
राजकोषीय संघवाद का अर्थ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय शक्तियों, संसाधनों और जिम्मेदारियों के विभाजन से है। यह मुख्य विषय इसलिए था क्योंकि बढ़ते ऋण, ऑफ-बजट उधारी और केंद्रीय हस्तांतरण पर निर्भरता से राज्यों की वित्तीय स्थिति दबाव में है।
CAG भारतीय संविधान के किन अनुच्छेदों के तहत राज्यों के वित्त की लेखा-परीक्षा करता है?
CAG भारतीय संविधान के अनुच्छेद 149-151 के तहत राज्य वित्त का ऑडिट करता है। अनुच्छेद 149 CAG के कर्तव्यों और शक्तियों को परिभाषित करता है, जबकि अनुच्छेद 150-151 खातों के प्रारूप और राज्य विधानमंडलों को दी जाने वाली ऑडिट रिपोर्ट से संबंधित हैं।
राजस्थान को उच्च राजकोषीय घाटे वाले राज्य के रूप में क्यों रेखांकित किया गया?
राजस्थान का बजट राजस्व व्यय-प्रधान है, जिसमें पूंजी निर्माण सीमित है। GSDP के अनुपात में ऋण अधिक है और सार्वजनिक उद्यमों को बड़ी गारंटियाँ दी गई हैं, इसलिए यह लगातार राजकोषीय दबाव झेलने वाले राज्यों में शामिल है।
ICSSR-CAG सहयोग का क्या महत्व है?
ICSSR-CAG सहयोग अर्थशास्त्रियों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को साथ लाकर राज्य वित्त के विश्लेषण और राजकोषीय स्थिरता के लिए सुधार सुझाने में मदद करता है। इससे बेहतर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के लिए शैक्षणिक साक्ष्य-आधार तैयार होता है।