प्रकाशित: 22 मार्च 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
नीति आयोग राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026: प्रमुख राज्यों में ओडिशा शीर्ष पर, राजस्थान 14वें स्थान पर
नीति आयोग ने मार्च 2026 में राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया। इसमें वित्त वर्ष 2023-24 के वे आँकड़े शामिल हैं जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) से लिए गए हैं। यह सूचकांक पाँच प्रमुख स्तंभों पर भारतीय राज्यों की राजकोषीय स्थिति का आकलन करता है: (1) राजकोषीय विवेक, (2) ऋण प्रबंधन, (3) राजस्व संग्रहण, (4) व्यय की गुणवत्ता और (5) राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि से तालमेल।
प्रमुख राज्यों (1 करोड़ से अधिक जनसंख्या) में ओडिशा लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष पर रहा। इसका कारण उसका कम ऋण-GSDP अनुपात, अपने करों से मिलने वाले राजस्व में तेज़ वृद्धि और पूंजीगत व्यय में अनुशासन रहा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश शीर्ष पर रहा, जो उसके बेहतर राजस्व संग्रहण और नियंत्रित उधारी को दर्शाता है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में राजस्थान की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है। सब्सिडी के भारी बोझ, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) से जुड़ी विद्युत क्षेत्र की देनदारियों और बड़े पेंशन दायित्वों के कारण राजस्थान लंबे समय से राजकोषीय दबाव का सामना करता रहा है। राज्य के ऋण-GSDP अनुपात और राजस्व घाटे पर पिछली CAG और वित्त आयोग की रिपोर्टों में चिंता जताई गई है। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत राज्यों को राजकोषीय घाटा GSDP के 3% के भीतर रखना होता है; राजस्थान ने अक्सर केंद्र से अतिरिक्त उधारी सीमा की मांग की है।
FHI 2026 इस तरह का पहला संस्करण था जिसमें व्यय की गुणवत्ता के मानक शामिल किए गए। इनमें कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात मापा गया। इससे केवल चालू व्यय करने वाले राज्यों की तुलना में भौतिक बुनियादी ढाँचे और मानव पूंजी में निवेश करने वाले राज्यों को बेहतर स्थान मिला।
यह सूचकांक RPSC/RAS अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राज्य वित्त, राजकोषीय संघवाद, CAG की भूमिका और FRBM का ढाँचा शामिल है। ये सभी प्रश्नपत्र 2 (भारतीय प्रशासन) और प्रश्नपत्र 3 (राजस्थान की अर्थव्यवस्था) में अधिक वेटेज वाले विषय हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: नीति आयोग के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026 के ढाँचे और राजस्थान के राजकोषीय प्रबंधन पर उसके प्रभावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
नीति आयोग का दूसरा राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (मार्च 2026) वित्त वर्ष 2023-24 के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के आँकड़ों से पाँच स्तंभों—राजकोषीय विवेक, ऋण प्रबंधन, राजस्व संग्रहण, व्यय की गुणवत्ता और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि—पर आकलन करता है। ओडिशा लगातार दूसरे वर्ष प्रमुख राज्यों में और अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर-हिमालयी राज्यों में शीर्ष पर रहा। बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) की देनदारियों, सब्सिडी और पेंशन दायित्वों से राजस्थान पर दबाव है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीति आयोग के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 के पाँच स्तंभ कौन-से हैं?
**राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026** पाँच स्तंभों पर राज्यों का आकलन करता है:
1. **राजकोषीय विवेक** — राजकोषीय घाटे का प्रबंधन
2. **ऋण प्रबंधन** — ऋण और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुपात
3. **राजस्व संग्रहण** — अपने करों और गैर-कर स्रोतों से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि
4. **व्यय की गुणवत्ता** — कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का हिस्सा
5. **GSDP वृद्धि से तालमेल** — राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि को आर्थिक वृद्धि के अनुरूप रखना
इस संस्करण में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) से मिले वित्त वर्ष 2023-24 के आँकड़ों का उपयोग किया गया।
ओडिशा राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 में प्रमुख राज्यों में शीर्ष पर क्यों रहा?
**ओडिशा** लगातार **दूसरे वर्ष** प्रमुख राज्यों में शीर्ष पर रहा। इसके तीन कारण थे: (1) ऋण और राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का कम अनुपात, (2) अपने करों से मिलने वाले राजस्व में तेज़ वृद्धि और (3) पूंजीगत व्यय में अनुशासन। विवेकपूर्ण उधारी और बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित खर्च के ज़रिए ओडिशा ने लगातार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) में राजस्थान की मुख्य राजकोषीय चुनौतियाँ क्या हैं?
राजस्थान लगातार **राजकोषीय दबाव** का सामना कर रहा है। इसके कारण हैं: (1) बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) के घाटे से जुड़ी ऊँची विद्युत क्षेत्र देनदारियाँ, (2) मुफ़्त बिजली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं सहित सब्सिडी का भारी बोझ, (3) बड़े पेंशन दायित्व और (4) ऊँचा राजस्व घाटा। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत राजस्थान अपने व्यय के लिए अक्सर केंद्र से अतिरिक्त उधारी सीमा मांगता रहा है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 में व्यय की गुणवत्ता के मानकों का क्या महत्व है?
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 **व्यय की गुणवत्ता के मानक** शामिल करने वाला **पहला संस्करण** था। इसमें खास तौर पर **कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात** मापा गया। इससे केवल चालू (राजस्व) व्यय करने के बजाय **भौतिक बुनियादी ढाँचे और मानव पूंजी** में निवेश करने वाले राज्यों को बेहतर अंक मिलते हैं। पूंजीगत व्यय का ऊँचा अनुपात अर्थव्यवस्था पर लंबे समय में अधिक गुणक प्रभाव का संकेत देता है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की क्या भूमिका है?
भारत का **नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)** राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक के लिए आँकड़ों का प्रमुख स्रोत है। CAG संघ और राज्य सरकारों के खातों की लेखा-परीक्षा करता है और **राजस्व प्राप्तियों, राजकोषीय घाटे तथा ऋण के स्तर** सहित प्रमाणित राजकोषीय आँकड़े प्रकाशित करता है। नीति आयोग राज्यों के आँकड़ों में एकरूपता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए CAG-प्रमाणित आँकड़ों का उपयोग करता है।