प्रकाशित: 21 मार्च 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
NITI आयोग राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026: ओडिशा शीर्ष पर, राजस्थान 14वें स्थान पर
नीति आयोग ने मार्च 2026 में राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया। यह भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) से प्राप्त वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित है। यह सूचकांक पांच प्रमुख स्तंभों पर राज्यों की राजकोषीय स्थिति का मूल्यांकन करता है: (1) व्यय की गुणवत्ता, (2) राजस्व परिचालन, (3) राजकोषीय विवेक, (4) ऋण सूचकांक, और (5) ऋण स्थिरता।
प्रमुख राज्यों (1 करोड़ से अधिक जनसंख्या) में ओडिशा लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष पर रहा। इसका कारण उसका कम ऋण और GSDP का अनुपात, अपने कर राजस्व में मजबूत वृद्धि और अनुशासित पूंजीगत व्यय रहा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश शीर्ष पर रहा।
राजस्थान की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। राजस्थान ऐतिहासिक रूप से उच्च सब्सिडी बोझ, विद्युत क्षेत्र की देनदारियों (DISCOM) और पेंशन दायित्वों के कारण राजकोषीय दबाव का सामना करता रहा है। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत, राज्यों को राजकोषीय घाटे को GSDP के 3% के भीतर रखना होता है।
FHI 2026 पहला संस्करण था जिसमें व्यय गुणवत्ता के मानक शामिल किए गए — यानी कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात मापा गया। इससे उन राज्यों को बेहतर स्थान मिला जो भौतिक बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश करते हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: नीति आयोग के राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026 तथा राजस्थान के राजकोषीय प्रबंधन पर निहितार्थ की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
नीति आयोग का दूसरा राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (मार्च 2026) वित्त वर्ष 2023-24 के CAG आँकड़ों पर आधारित है और पाँच स्तंभों से आकलन करता है: राजकोषीय विवेक, ऋण प्रबंधन, राजस्व संग्रहण, व्यय गुणवत्ता, जीएसडीपी वृद्धि। ओडिशा प्रमुख राज्यों में लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष पर रहा; अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर-हिमालयी राज्यों में अव्वल रहा। राजस्थान पर डिस्कॉम देनदारियों, सब्सिडी और पेंशन बोझ का दबाव है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NITI आयोग राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026 के पांच स्तंभ कौन से हैं?
**राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026** पांच स्तंभों पर राज्यों का मूल्यांकन करता है:
1. **राजकोषीय विवेक** — राजकोषीय घाटा प्रबंधन
2. **ऋण प्रबंधन** — ऋण-से-GSDP अनुपात
3. **राजस्व परिचालन** — स्वयं-कर और गैर-कर राजस्व वृद्धि
4. **व्यय की गुणवत्ता** — कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का हिस्सा
5. **GSDP वृद्धि संरेखण** — राजस्व प्राप्तियां आर्थिक वृद्धि के अनुरूप
इस संस्करण के लिए CAG से प्राप्त वित्त वर्ष 2023-24 का डेटा उपयोग किया गया।
ओडिशा ने FHI 2026 में प्रमुख राज्यों में शीर्ष स्थान क्यों हासिल किया?
**ओडिशा** ने **लगातार दूसरे वर्ष** प्रमुख राज्यों में शीर्ष स्थान हासिल किया क्योंकि उसका: (1) **ऋण-से-GSDP अनुपात** कम है, (2) **स्वयं-कर राजस्व वृद्धि** मजबूत है, और (3) **पूंजीगत व्यय** अनुशासित है।
FHI में राजस्थान की मुख्य राजकोषीय चुनौतियां क्या हैं?
राजस्थान को निरंतर **राजकोषीय दबाव** का सामना है: (1) उच्च **विद्युत क्षेत्र देनदारियां (DISCOM घाटे)**, (2) बड़ा **सब्सिडी बोझ** जिसमें मुफ्त बिजली और अन्य कल्याण योजनाएं शामिल हैं, (3) बड़े **पेंशन दायित्व**, और (4) उच्च **राजस्व घाटा**। **FRBM अधिनियम** के तहत राजस्थान अक्सर केंद्र से **अतिरिक्त उधार सीमा** मांगता है।
FHI 2026 में व्यय गुणवत्ता मेट्रिक्स का क्या महत्व है?
FHI 2026 **व्यय गुणवत्ता मेट्रिक्स** शामिल करने वाला **पहला संस्करण** था, विशेष रूप से **कुल व्यय में पूंजीगत व्यय के अनुपात** को मापते हुए। यह उन राज्यों को पुरस्कृत करता है जो **भौतिक बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी** में निवेश करते हैं।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में CAG की क्या भूमिका है?
**नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)** राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक के लिए प्राथमिक डेटा स्रोत है। CAG केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का ऑडिट करता है और **राजस्व प्राप्तियों, राजकोषीय घाटे और ऋण स्तरों** सहित प्रमाणित राजकोषीय डेटा प्रकाशित करता है। NITI आयोग राज्यों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इस CAG-प्रमाणित डेटा का उपयोग करता है।