नीति आयोग ने मार्च 2026 में राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया। यह भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) से प्राप्त वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित है। यह सूचकांक पांच प्रमुख स्तंभों पर राज्यों की राजकोषीय स्थिति का मूल्यांकन करता है: (1) व्यय की गुणवत्ता, (2) राजस्व परिचालन, (3) राजकोषीय विवेक, (4) ऋण सूचकांक, और (5) ऋण स्थिरता।

प्रमुख राज्यों (1 करोड़ से अधिक जनसंख्या) में ओडिशा लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष पर रहा। इसका कारण उसका कम ऋण और GSDP का अनुपात, अपने कर राजस्व में मजबूत वृद्धि और अनुशासित पूंजीगत व्यय रहा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश शीर्ष पर रहा।

राजस्थान की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। राजस्थान ऐतिहासिक रूप से उच्च सब्सिडी बोझ, विद्युत क्षेत्र की देनदारियों (DISCOM) और पेंशन दायित्वों के कारण राजकोषीय दबाव का सामना करता रहा है। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत, राज्यों को राजकोषीय घाटे को GSDP के 3% के भीतर रखना होता है।

FHI 2026 पहला संस्करण था जिसमें व्यय गुणवत्ता के मानक शामिल किए गए — यानी कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का अनुपात मापा गया। इससे उन राज्यों को बेहतर स्थान मिला जो भौतिक बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश करते हैं।