12 मार्च 2026 को नीति आयोग ने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक 2026 जारी किया। यह सूचकांक वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राज्यों की राजकोषीय स्थिति को समझने का परीक्षा-उपयोगी आधार देता है। इसमें 18 सामान्य श्रेणी राज्यों और 10 पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों का अलग-अलग आकलन किया गया। पांच स्तंभ हैं: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाव, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता।

प्रमुख राज्यों में ओडिशा 73.1 स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहा और लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष पर रहा। उसके बाद गोवा, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ रहे। राजस्थान 27.6 स्कोर और 14वें स्थान के साथ समग्र रूप से परफॉर्मर श्रेणी में रहा। राजस्थान को पूरे सूचकांक में फ्रंट रनर नहीं माना गया। उसका सुधार केवल व्यय की गुणवत्ता वाले स्तंभ में दिखा, जहां राजस्थान 43.7 स्कोर और 11वें स्थान के साथ परफॉर्मर से फ्रंट रनर श्रेणी में पहुंचा।

राजस्थान के लिए परीक्षा की दृष्टि से मुख्य संदेश राजकोषीय दबाव है। राज्य की राजकोषीय स्थिति पर घाटे, ऊंचे ऋण स्तर और विकास खर्च के लिए सीमित गुंजाइश का दबाव बताया गया। ब्याज भुगतान, वेतन और पेंशन जैसे प्रतिबद्ध खर्च राजस्व प्राप्तियों का बड़ा हिस्सा लेते हैं। ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात लगातार 35% से ऊपर रहा। स्थैतिक तैयारी में इसे राजकोषीय संघवाद, राज्य बजट, ऋण प्रबंधन और राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन कानून से जोड़कर पढ़ना उपयोगी है। RAS और UPSC दोनों में इससे प्रीलिम्स में सूचकांक, रैंक और स्तंभ पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में राज्य वित्त, खर्च की गुणवत्ता और विकास प्राथमिकताओं पर विश्लेषणात्मक उत्तर बन सकता है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश पहले स्थान पर रहा, इसलिए इस सूचकांक में दो अलग रैंकिंग समूह याद रखना जरूरी है।