नीति आयोग ने अपने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) का दूसरा संस्करण जारी किया है, जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) से प्राप्त FY 2023-24 के आँकड़ों पर आधारित है। यह सूचकांक 18 सामान्य श्रेणी के राज्यों और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्रों के 10 विशेष श्रेणी के राज्यों को उनके समग्र राजकोषीय स्वास्थ्य के आधार पर रैंक करता है।
FHI पाँच स्तंभों पर आधारित है: (1) व्यय की गुणवत्ता — यह देखना कि खर्च उत्पादक और पूंजीगत उद्देश्यों की ओर जा रहा है या नहीं; (2) राजस्व संग्रहण — राज्यों की अपना राजस्व जुटाने की क्षमता का आकलन; (3) राजकोषीय विवेक — घाटा प्रबंधन और राजकोषीय अनुशासन का मूल्यांकन; (4) ऋण सूचकांक — राज्य की अर्थव्यवस्था की तुलना में कुल ऋण भार का आकलन; और (5) ऋण स्थिरता — यह जाँचना कि उधारी की गति समय के साथ टिकाऊ है या नहीं।
ओडिशा ने लगातार दूसरे संस्करण में सामान्य श्रेणी के राज्यों की समग्र रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जो राजकोषीय प्रबंधन में, विशेष रूप से पूंजीगत व्यय और ऋण स्थिरता में, उसकी निरंतर उत्कृष्टता को दर्शाता है।
राजस्थान के लिए, इस दूसरे संस्करण में एक महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है: राज्य को व्यय की गुणवत्ता स्तंभ में "परफॉर्मर" श्रेणी से "फ्रंट रनर" श्रेणी में रखा गया है। यह दिखाता है कि राज्य सरकार का खर्च पूंजी निर्माण, बुनियादी ढाँचे और उत्पादक सार्वजनिक सेवाओं की ओर बेहतर ढंग से निर्देशित हो रहा है — जो राजकोषीय शासन में एक सार्थक सुधार है।
यह सूचकांक 18 सामान्य श्रेणी के राज्यों और 10 पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों को शामिल करता है, जिससे भारत में उप-राष्ट्रीय राजकोषीय स्वास्थ्य के आकलन के लिए एक व्यापक तुलनात्मक रूपरेखा मिलती है। इसका उद्देश्य राज्यों को अपने राजकोषीय प्रदर्शन की तुलना करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक नीतिगत उपकरण देना है।
