नीति आयोग ने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 का दूसरा संस्करण जारी किया है, जिसमें वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारतीय राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया है। यह सूचकांक नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के ऑडिट डेटा पर आधारित है और राज्यों को पाँच स्तंभों पर आँकता है: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता।
FHI 2026 में 18 सामान्य श्रेणी के राज्यों और 10 पूर्वोत्तर तथा पर्वतीय राज्यों का अलग-अलग मूल्यांकन किया गया है। राज्यों को चार श्रेणियों में रखा गया है: अचीवर, फ्रंट रनर, परफॉर्मर और एस्पायरेंट।
सामान्य श्रेणी में ओडिशा शीर्ष पर है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में अरुणाचल प्रदेश आगे है।
राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण निष्कर्ष: राज्य ने व्यय की गुणवत्ता के मामले में 'परफॉर्मर' से 'फ्रंट रनर' श्रेणी में प्रवेश किया है। इससे पता चलता है कि राजस्थान ने सार्वजनिक व्यय को पूंजीगत निवेश, सामाजिक सेवाओं और परिणाम-आधारित कार्यक्रमों की ओर मोड़ने में प्रगति की है।
समग्र सूचकांक में राजस्थान अभी भी 'परफॉर्मर' श्रेणी में है। राजस्व जुटाना, ऋण स्थिरता और राजकोषीय समेकन जैसे क्षेत्रों में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। राज्य का राजकोषीय घाटा और GSDP के अनुपात में ऋण पर ध्यान देने की जरूरत है।
यह सूचकांक राज्यों को अपने वित्त की तुलना करने और वित्त आयोग की सिफारिशों को दिशा देने में सहायक है। RAS अभ्यर्थियों के लिए यह सहकारी संघवाद, FRBM अधिनियम, CAG की भूमिका और विकसित राजस्थान एजेंडे को समझने के लिए प्रासंगिक है।
