कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने 29 मई 2026 को मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्य मंत्रिपरिषद को भंग किया और उत्तराधिकारी के शपथ ग्रहण तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने को कहा। श्री सिद्धारमैया ने 28 मई 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आलाकमान के निर्देश और मध्यावधि सत्ता साझेदारी समझौते के बाद अपना इस्तीफा सौंपा था। इस समझौते में मई 2023 में निर्वाचित कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन की बात रखी गई थी। उप मुख्यमंत्री श्री डी के शिवकुमार, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इससे हाल के राज्य राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस के भीतर हुए सबसे चर्चित नेतृत्व बदलावों में से एक पूरा होगा। राज्यपाल ने संवैधानिक परंपरा के अनुरूप सरकार के मुखिया का इस्तीफा स्वीकार किया और अनुच्छेद 164(1) के तहत विधायी दल के नेता को नया मंत्रिमंडल बनाने के लिए आमंत्रित किया। यह नेतृत्व परिवर्तन इस तरह तय किया गया है कि नए मुख्यमंत्री को शासन सुदृढ़ करने, अन्न भाग्य, शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति और युव निधि जैसी कल्याण गारंटी योजनाओं को पूरा करने तथा 2028 कर्नाटक विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनावों के लिए राज्य संगठन तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। विश्लेषकों ने कहा कि यह सहज हस्तांतरण सामूहिक उत्तरदायित्व के संवैधानिक सिद्धांत और सत्तारूढ़ दलों के भीतर सदन परीक्षण के बिना बातचीत से नेतृत्व बदलने की राजनीतिक परंपरा को रेखांकित करता है।
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 29 मई 2026 को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार किया, राज्य मंत्रिमंडल भंग किया और उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने को कहा, जब तक उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मध्यावधि सत्ता साझेदारी समझौते के तहत शपथ नहीं दिला दी जाती; इससे 2028 विधानसभा चुनावों से पहले कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 29 मई 2026 को अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार किया, जिससे कांग्रेस के मध्यावधि सत्ता-साझेदारी समझौते के अनुसार उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के पदभार ग्रहण करने का रास्ता साफ हुआ।
मुख्य तथ्य
- कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 29 मई 2026 को अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार किया
- मंत्रिपरिषद भंग; सिद्धारमैया को उत्तराधिकारी के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा गया
- उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भी हैं, अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे
- तीन वर्ष सरकार चलने के बाद कांग्रेस के मध्यावधि सत्ता-साझेदारी समझौते के तहत नेतृत्व परिवर्तन
- यह बदलाव 2028 कर्नाटक विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनावों से पहले के समय को ध्यान में रखकर किया गया
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद यह उपबंध करता है कि किसी राज्य की मंत्रिपरिषद विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी और मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे?
अनुच्छेद 164 में प्रावधान है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेंगे और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करेंगे। अनुच्छेद 164(1) नियुक्ति से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 164(2) मंत्रिपरिषद के राज्य विधान सभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व और इस बात को निर्धारित करता है कि मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राज्यपाल मुख्यमंत्री का इस्तीफा संविधान के किस अनुच्छेद के तहत स्वीकार करते हैं?
अनुच्छेद 164 के तहत संवैधानिक परंपरा यही है कि मंत्रिपरिषद राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर रहती है और मुख्यमंत्री के ज़रिए इस्तीफा देती है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया का उत्तराधिकारी कौन होगा?
उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, जो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भी हैं, अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं।
इस बदलाव में कौन सा संवैधानिक सिद्धांत दिखाई देता है?
यह अनुच्छेद 164(2) के तहत सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत और इस परंपरा को दिखाता है कि विधायी दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
इस संदर्भ में कर्नाटक की कौन-कौन सी प्रमुख कल्याणकारी गारंटी योजनाएं उल्लिखित हैं?
अन्न भाग्य, शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति और युव निधि कर्नाटक कांग्रेस सरकार की पांच गारंटी योजनाएं हैं।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें