मुख्य तथ्य

  • एस.आर. बोम्मई के बाद अनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा के अधीन है, खासकर जब बहुमत सदन में परखा जा सकता हो।
  • 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के अनुभव के बाद 44वें संशोधन ने आपात शक्तियों को सीमित किया।
  • राजस्थान का संबंध पुनर्गठन, अनुच्छेद 301 व्यापार, जीएसटी और राष्ट्रपति शासन की अवधियों से जुड़ता है।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    भारत राज्यों का संघ है, जिसमें विषयों का संघीय वितरण और मजबूत केंद्रीय ढांचा साथ-साथ चलता है।

  2. 2

    एस.आर. बोम्मई के बाद अनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा के अधीन है, खासकर जब बहुमत सदन में परखा जा सकता हो।

  3. 3

    1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के अनुभव के बाद 44वें संशोधन ने आपात शक्तियों को सीमित किया।

  4. 4

    राजस्थान का संबंध पुनर्गठन, अनुच्छेद 301 व्यापार, जीएसटी और राष्ट्रपति शासन की अवधियों से जुड़ता है।

PYQ दोहराव

पिछले 10 साल: 6 बार पूछा गयाकुल जुड़े PYQ: 10

यह टॉपिक 2023, 2021, 2018, 2016, 2013 में पूछा गया है। पहले नोट दोहराएँ, फिर जुड़े प्रश्न खोलें।

भारत को राज्यों का संघ क्यों कहा जाता है?

भारत को राज्यों का संघ इसलिए कहा जाता है क्योंकि अनुच्छेद 1 संघ को संविधान से बना ढांचा मानता है और किसी राज्य को अलग होने का स्वतंत्र अधिकार नहीं देता। अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ कहता है। इसका अर्थ है कि संघ संविधान से बना है और किसी राज्य को अलग होने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है।

जनगणना 2011 के अनुसार राजस्थान की कुल आबादी 6,85,48,437 दर्ज थी, इसलिए राज्य-क्षेत्र से जुड़ा कोई भी संवैधानिक बदलाव केवल नक्शे का तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि बड़े जन-प्रशासन से जुड़ा निर्णय भी होता है।

प्रावधान / वाद / संशोधनमुख्य बिंदु
अनुच्छेद 1भारत को राज्यों का संघ कहता है; संघ संविधान से बना है और किसी राज्य को अलग होने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है।
अनुच्छेद 3संसद नया राज्य बना सकती है, सीमा बदल सकती है, नाम बदल सकती है या क्षेत्र घटा-बढ़ा सकती है, पर राष्ट्रपति पहले प्रस्ताव संबंधित राज्य विधानमंडल को मत देने के लिए भेजता है।
पश्चिम बंगाल राज्य बनाम भारत संघ, 1963स्पष्ट किया कि राज्य संघ के बराबर संप्रभु इकाई नहीं है।
बेरुबारी संघ संदर्भ, 1960भारतीय क्षेत्र किसी विदेशी राज्य को देने के लिए केवल कार्यपालिका समझौता काफी नहीं, संविधान संशोधन चाहिए।
संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956भाग क, भाग ख और भाग ग श्रेणियों को हटाकर आधुनिक राज्य संरचना मजबूत की।

राजस्थान से संबंध

  • राजस्थान इस ढांचे से सीधे जुड़ता है।
  • रियासती संघों से बना राजस्थान 1956 से पहले एकीकृत हो चुका था।
  • संविधान में राजस्थान की स्थिति अनुच्छेद 1 और प्रथम अनुसूची से आती है।
  • अनुच्छेद 3 आज भी राज्य क्षेत्र या नाम बदलने पर काम आता है।

परामर्श, वीटो नहीं

  • ढांचा परामर्श का है, वीटो का नहीं: राज्य विधानमंडल सुना जाता है, अंतिम कानून संसद बनाती है।
  • सीमा जिला, राज्य का नया नाम या क्षेत्र विनिमय संप्रभु भागीदारों का सौदा नहीं है।
  • यह संवैधानिक प्रक्रिया है जिसमें राज्य का मत सुना जाता है और राष्ट्रीय क्षेत्रीय निरंतरता संघ की जिम्मेदारी रहती है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQकिस निर्णय ने अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा को न्यायिक समीक्षा के अधीन माना और बहुमत के पटल परीक्षण को महत्व दिया?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aएस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघसही
  2. Bबेरुबारी संघ संदर्भ
  3. Cआटियाबारी टी कंपनी बनाम असम राज्य
  4. Dभारत संघ बनाम एच.एस. ढिल्लों

व्याख्या

एस.आर. बोम्मई सही है क्योंकि इसने अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा को न्यायिक समीक्षा के अधीन रखा और बहुमत जांच के लिए विधानसभा पटल को उचित माना। बेरुबारी क्षेत्र हस्तांतरण से, आटियाबारी अनुच्छेद 301 व्यापार स्वतंत्रता से और एच.एस. ढिल्लों अवशिष्ट विधायी शक्ति से संबंधित हैं।

~50 शब्द · 1 अंक