प्रकाशित: 24 जनवरी 2026टॉपिक
भारतीय रेलवे ने विशाखापत्तनम स्टेशन पर ह्यूमनॉइड रोबोट 'ASC अर्जुन' तैनात किया
पीआईबी ने 23 जनवरी 2026 को घोषणा की कि भारतीय रेलवे 24 जनवरी 2026 को विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर अपना पहला मानव-सदृश रोबोट 'ASC ARJUN' तैनात करेगा। यात्रियों की सहायता और सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए इस रोबोट में चेहरे की पहचान, एआई की मदद से भीड़ की निगरानी और अर्ध-स्वायत्त रूप से चलने की क्षमता है।
ASC ARJUN प्लेटफॉर्म पर गश्त कर सकता है, वीडियो का तुरंत विश्लेषण करके संदिग्ध गतिविधि का पता लगा सकता है और यात्रियों को कई भाषाओं में जानकारी दे सकता है। इसे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और देश की एक रोबोटिक्स कंपनी ने मिलकर विकसित किया है। नई दिल्ली और मुंबई स्टेशनों पर सफाई के लिए रोबोट तैनात करने के बाद उठाया गया यह कदम स्टेशन प्रबंधन में एआई और स्वचालन बढ़ाने के भारतीय रेलवे के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ASC ARJUN क्या है और भारतीय रेलवे ने इसे विशाखापत्तनम स्टेशन पर क्यों तैनात किया?
**ASC ARJUN** रेलवे में इस्तेमाल होने वाला भारत का पहला मानव-सदृश रोबोट है, जिसे **भारतीय रेलवे** ने आंध्र प्रदेश के **विशाखापत्तनम (विज़ाग) रेलवे स्टेशन** पर तैनात किया। यह यात्रियों को ट्रेन के समय, प्लेटफॉर्म की जानकारी और टिकट से जुड़े सवालों के जवाब देता है, **रास्ता बताता है** और **एआई-आधारित यात्री सेवाओं** की दिशा में रेलवे की प्रगति को दर्शाता है। ASC ARJUN **भारतीय रेलवे में व्यापक डिजिटल बदलाव लाने की पहल** का हिस्सा है।
विशाखापत्तनम स्टेशन पर मानव-सदृश रोबोट ASC ARJUN की क्या क्षमताएँ हैं?
**ASC ARJUN** कई भाषाओं में ट्रेन के समय, देरी और प्लेटफॉर्म की जानकारी से जुड़े **आम बोलचाल में पूछे गए सवालों** का जवाब दे सकता है; जिन यात्रियों को स्टेशन की जानकारी नहीं है, उन्हें **रास्ता बता सकता है**; **टचस्क्रीन** के ज़रिए टिकट बुक करने में मदद कर सकता है; **यात्रियों की राय** ले सकता है; और स्टेशन के भीतर अर्ध-स्वायत्त रूप से चल सकता है। यह सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में **एआई, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और रोबोटिक्स** के मेल का उदाहरण है।
भारतीय रेलवे की तकनीकी आधुनिकीकरण की व्यापक योजना क्या है?
**भारतीय रेलवे** बड़े स्तर पर तकनीकी बदलाव कर रहा है। इनमें **कवच 4.0** (स्वचालित रेल सुरक्षा प्रणाली), **सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेनें**, परीक्षण के दौर से गुजर रही **हाइड्रोजन ट्रेनें**, **एक स्टेशन एक उत्पाद** पहल, पर्यटकों के लिए **उत्सव ट्रेन** सेवाएँ, **RailTel** का डिजिटल बुनियादी ढाँचा, **नॉन-मॉनेटाइज़ेशन गेटवे (NMG)** और **प्रधानमंत्री गति शक्ति** के तहत स्टेशनों का पुनर्विकास शामिल हैं। **राष्ट्रीय रेल योजना 2030** में 100% विद्युतीकरण, दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई मार्गों पर गति बढ़ाकर 160 kmph करने, अन्य स्वर्णिम चतुर्भुज और स्वर्णिम विकर्ण (GQ/GD) मार्गों पर गति बढ़ाकर 130 kmph करने तथा 2030 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने का लक्ष्य है।
रेलवे और रणनीतिक केंद्र के रूप में विशाखापत्तनम का क्या महत्व है?
**विशाखापत्तनम (विज़ाग)** में A1 श्रेणी का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है और यह पूर्वी भारत का रणनीतिक केंद्र है। यहाँ **पूर्वी नौसेना कमान** का मुख्यालय, **राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड का विज़ाग स्टील संयंत्र (RINL-विज़ाग स्टील)**, **हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) की रिफाइनरी** और **हिंदुस्तान शिपयार्ड** स्थित हैं। तीन राजधानियों के प्रस्ताव के तहत यह शहर आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित **कार्यकारी राजधानी** भी है। रेलवे स्टेशन भारत के पूर्वी तट तक पहुँच का एक प्रमुख केंद्र है और **अमृत भारत स्टेशन योजना** के तहत इसका आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन में रोबोट की तैनाती के मामले में भारत की स्थिति वैश्विक रुझानों की तुलना में कैसी है?
**ASC ARJUN** की तैनाती वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। **जापान के Pepper रोबोट** हवाई अड्डों और स्टेशनों पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, दक्षिण कोरिया के प्रमुख परिवहन केंद्रों पर एआई कियोस्क लगाए गए हैं और सिंगापुर के **चांगी हवाई अड्डे** पर सफाई और रास्ता बताने के लिए स्वायत्त रोबोट काम करते हैं। MarketsandMarkets के अनुसार, **मानव-सदृश रोबोटों का वैश्विक बाज़ार 2028 तक 13.8 अरब डॉलर** तक पहुँचने का अनुमान है। भारतीय रेलवे में मानव-सदृश रोबोट की तैनाती **राष्ट्रीय एआई रणनीति** और **डिजिटल इंडिया** मिशन के तहत सार्वजनिक सेवाओं में एआई को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों को दर्शाती है।