सरकार ने 22 सितंबर 2025 से जीएसटी 2.0 लागू किया। प्रधानमंत्री ने इसे 'जीएसटी बचत उत्सव' कहा, क्योंकि इसका मुख्य संदेश आम उपभोक्ता और छोटे कारोबारों को राहत देना था। इस सुधार पैकेज में कर स्लैब को तर्कसंगत बनाया गया, 390 से अधिक वस्तुओं पर दरें घटाई गईं और अनुपालन को सरल बनाने पर जोर दिया गया। आर्थिक नीति की दृष्टि से यह कदम उपभोग बढ़ाने, लागत घटाने और एमएसएमई पर अनुपालन बोझ कम करने से जुड़ा है।

परीक्षा में इस सुधार से दर-ढांचे, कर-अनुपालन, उपभोक्ता मांग और छोटे व्यवसायों पर असर जैसे बिंदु सीधे पूछे जा सकते हैं। जीएसटी 2017 में लागू होने के बाद कर ढांचे को एकीकृत करने वाला बड़ा सुधार रहा है; इसलिए किसी बड़े बदलाव में दर-ढांचा, कर-अनुपालन, उपभोक्ता मांग और छोटे व्यवसायों पर असर जैसे पहलू महत्वपूर्ण बन जाते हैं। जीएसटी 2.0 में रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया सरल करने, कर स्लैब की संख्या घटाने और कंपोजिशन स्कीम की पात्रता सीमा बढ़ाने जैसे संरचनात्मक बदलाव बताए गए हैं।

जीएसटी विवादों के समाधान के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की शुरुआत की। यह प्रथम अपीलीय प्राधिकारी से ऊपर एक समर्पित अर्ध-न्यायिक व्यवस्था के रूप में काम करता है। प्रारंभिक परीक्षा में तारीख, नाम, 390 से अधिक वस्तुओं पर दर कटौती, एमएसएमई राहत और अनुपालन सरलीकरण पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में कर सुधार, उपभोग-प्रोत्साहन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जोड़कर छोटा विश्लेषण लिखा जा सकता है। राजस्थान सहित राज्य परीक्षाओं में भी कर दरों और उपभोक्ता राहत से जुड़े ऐसे केंद्र-राज्य प्रभाव पूछे जा सकते हैं।