गोवा ने 9 फरवरी 2026 को वालपोई में आयोजित 9वें गोवा पक्षी महोत्सव के दौरान गोवा पक्षी एटलस प्रकाशित किया। इसके साथ गोवा, केरल के बाद व्यापक पक्षी एटलस रखने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया। यह तथ्य परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें जैव विविधता का दस्तावेजीकरण, नागरिक विज्ञान, पश्चिमी घाट, तटीय आवास और संरक्षण योजना जैसे स्थैतिक विषय एक ही करेंट अफेयर्स उदाहरण में जुड़ते हैं।

गोवा पक्षी एटलस में राज्य के विविध आवासों में पाई जाने वाली 470 से अधिक पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इनमें पश्चिमी घाट, तटीय आर्द्रभूमि और नदीमुख जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पश्चिमी घाट वाला हिस्सा वन्य और स्थानिक पक्षी प्रजातियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जबकि तटीय आर्द्रभूमि और नदीमुख प्रवासी पक्षियों तथा जल-पक्षियों के अध्ययन में उपयोगी संदर्भ देते हैं।

इस परियोजना में 300 से अधिक नागरिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया और तीन वर्षों में 2,500 से अधिक स्थानों पर व्यवस्थित सर्वेक्षण किए। इसलिए यह केवल पक्षियों की सूची नहीं है, बल्कि राज्य में जैव विविधता की निगरानी और संरक्षण योजना के लिए आधार रेखा भी है। इसे भारत का भूगोल, विश्व भूगोल, जैव विविधता और पक्षी संरक्षण जैसे स्थैतिक सामान्य ज्ञान विषयों से जोड़ा जा सकता है। नागरिक विज्ञान वाला पहलू नागरिक भागीदारी और संरक्षण योजना में स्थानीय सहयोग को समझने में मदद करता है।

प्रीलिम्स में इससे दिनांक, स्थान (वालपोई), राज्य-विशेष उपलब्धि, पहला-दूसरा राज्य, प्रजातियों की संख्या, नागरिक वैज्ञानिकों की भागीदारी और आवासों पर प्रश्न बन सकते हैं।