प्रकाशित: 18 दिसंबर 2025CAG/PRSशासन
CAG रिपोर्टों में 21,695.11 करोड़ रुपये की जीएसटी अनुपालन गड़बड़ी, पीएमकेवीवाई के आंकड़ों में खामियां और नौसेना के निर्माण कार्यों में देरी उजागर
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने दिसंबर 2025 में संसद में कई लेखापरीक्षा रिपोर्टें पेश कीं। इनमें जीएसटी नियमों के पालन, कौशल विकास और रक्षा कार्यों के प्रबंधन से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष शामिल थे।
जीएसटी लेखापरीक्षा में विभाग से मिले जवाबों तथा आँकड़ों में पाई गई विसंगतियों की जाँच के बाद CAG ने नियमों के पालन से जुड़ी 2,519 गड़बड़ियाँ दर्ज कीं, जिनमें ₹21,695.11 करोड़ शामिल थे। मुख्य जोखिमों में ब्याज का कम भुगतान, वस्तु एवं सेवा कर विवरणी-1 (GSTR-1) दाखिल करने के बावजूद वस्तु एवं सेवा कर विवरणी-3B (GSTR-3B) दाखिल न करना, अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट, कर देनदारी का भुगतान न करना और आपूर्तिकर्ता के कर जमा किए बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे देना शामिल था।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की निष्पादन लेखापरीक्षा में लक्षित लाभार्थियों को योजना से जोड़ने और उनका सत्यापन करने की व्यवस्था कमज़ोर पाई गई। CAG ने यह भी पाया कि केरल में प्रशिक्षण भागीदारों ने प्लेसमेंट के गलत दस्तावेज़ दिए थे। कुछ घटकों में निगरानी और क्रियान्वयन से जुड़े कई अभिलेख भी भरोसेमंद नहीं थे।
भारतीय नौसेना से संबंधित CAG की 2025 की रिपोर्ट संख्या 30 सामान्य नौसैनिक खरीद की नहीं, बल्कि कार्यों के प्रबंधन की निष्पादन लेखापरीक्षा थी। इसमें जाँच के लिए चुने गए कार्यों के प्रशासनिक अनुमोदन और अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी पाई गई। एटीडब्ल्यूपी के 14 में से 13 अनुबंधों और जाँचे गए सभी 47 एएमडब्ल्यूपी अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी हुई।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: दिसंबर 2025 में संसद में प्रस्तुत CAG ऑडिट रिपोर्टों के निष्कर्षों और शासन की जवाबदेही पर उनके निहितार्थ की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
CAG ने 18–19 दिसंबर 2025 को संसद में रिपोर्टें प्रस्तुत कीं — जीएसटी अनुपालन में 21,695 करोड़ की खामियाँ, पीएमकेवीवाई में ऐसे प्लेसमेंट जिन्हें सत्यापित नहीं किया जा सका और फर्जी लाभार्थी, नौसेना खरीद में 72% देरी, डिजिटल इंडिया में फर्जी पते। ये निष्कर्ष कार्यान्वयन की कमज़ोरियाँ दिखाते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करने में CAG की संवैधानिक भूमिका को सुदृढ़ करते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) क्या है और उसकी संवैधानिक भूमिका क्या है?
भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) अनुच्छेद 148 के तहत एक संवैधानिक प्राधिकरण है। यह केंद्र और राज्यों के खातों की लेखापरीक्षा करता है, वित्तीय जवाबदेही में मदद करता है और अनियमितताओं की जानकारी संसद को देता है।
दिसंबर 2025 की लेखापरीक्षा में CAG को जीएसटी नियमों के पालन में कितनी गड़बड़ियाँ मिलीं?
CAG ने जीएसटी नियमों के पालन से जुड़ी 2,519 गड़बड़ियाँ दर्ज कीं, जिनमें ₹21,695.11 करोड़ शामिल थे। इनमें ब्याज का कम भुगतान, अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट और आपूर्तिकर्ता के कर जमा किए बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे देना शामिल था।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की लेखापरीक्षा के मुख्य निष्कर्ष क्या थे?
लेखापरीक्षा में लक्षित लाभार्थियों को योजना से जोड़ने और उनका सत्यापन करने की व्यवस्था कमज़ोर पाई गई। यह भी पाया गया कि केरल में प्रशिक्षण भागीदारों ने प्लेसमेंट के गलत दस्तावेज़ दिए थे और निगरानी व क्रियान्वयन से जुड़े कुछ अभिलेख भरोसेमंद नहीं थे।
भारतीय नौसेना के कार्यों के प्रबंधन में CAG ने किस तरह की देरी पाई?
जाँचे गए कार्यों में एटीडब्ल्यूपी के 14 में से 13 और एएमडब्ल्यूपी के सभी 47 अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी हुई। यह रिपोर्ट कार्यों के प्रबंधन पर थी, सामान्य नौसैनिक खरीद पर नहीं।
PMKVY के तहत निगरानी और क्रियान्वयन के अभिलेखों के बारे में लेखापरीक्षा में क्या कहा गया?
CAG ने पाया कि PMKVY के कुछ घटकों में निगरानी और क्रियान्वयन से जुड़े कई अभिलेख भरोसेमंद नहीं थे।