भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने दिसंबर 2025 में संसद में कई लेखापरीक्षा रिपोर्टें पेश कीं। इनमें जीएसटी नियमों के पालन, कौशल विकास और रक्षा कार्यों के प्रबंधन से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष शामिल थे।

जीएसटी लेखापरीक्षा में विभाग से मिले जवाबों तथा आँकड़ों में पाई गई विसंगतियों की जाँच के बाद CAG ने नियमों के पालन से जुड़ी 2,519 गड़बड़ियाँ दर्ज कीं, जिनमें ₹21,695.11 करोड़ शामिल थे। मुख्य जोखिमों में ब्याज का कम भुगतान, वस्तु एवं सेवा कर विवरणी-1 (GSTR-1) दाखिल करने के बावजूद वस्तु एवं सेवा कर विवरणी-3B (GSTR-3B) दाखिल न करना, अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट, कर देनदारी का भुगतान न करना और आपूर्तिकर्ता के कर जमा किए बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे देना शामिल था।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की निष्पादन लेखापरीक्षा में लक्षित लाभार्थियों को योजना से जोड़ने और उनका सत्यापन करने की व्यवस्था कमज़ोर पाई गई। CAG ने यह भी पाया कि केरल में प्रशिक्षण भागीदारों ने प्लेसमेंट के गलत दस्तावेज़ दिए थे। कुछ घटकों में निगरानी और क्रियान्वयन से जुड़े कई अभिलेख भी भरोसेमंद नहीं थे।

भारतीय नौसेना से संबंधित CAG की 2025 की रिपोर्ट संख्या 30 सामान्य नौसैनिक खरीद की नहीं, बल्कि कार्यों के प्रबंधन की निष्पादन लेखापरीक्षा थी। इसमें जाँच के लिए चुने गए कार्यों के प्रशासनिक अनुमोदन और अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी पाई गई। एटीडब्ल्यूपी के 14 में से 13 अनुबंधों और जाँचे गए सभी 47 एएमडब्ल्यूपी अनुबंधों को अंतिम रूप देने में देरी हुई।