16वें वित्त आयोग की अध्यक्षता डॉ. अरविंद पनगढ़िया कर रहे हैं। आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट संसद में फरवरी 2026 में पेश की। आयोग ने सिफारिश की कि राज्यों को केंद्रीय करों के विभाज्य पूल का 41% हिस्सा मिले — जो 15वें वित्त आयोग के बराबर है — जिससे केंद्र और राज्यों के बीच क्षैतिज समता बनी रहे।

क्षैतिज हस्तांतरण सूत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि राज्यों की GDP योगदान को 10% नया भार दिया गया है। राजकोषीय सुदृढ़ीकरण रोडमैप के तहत केंद्र सरकार को 2030-31 तक राजकोषीय घाटा GDP के 3.5% तक लाना होगा, जबकि राज्यों के लिए यह सीमा उनके GSDP का 3% निर्धारित की गई है।

स्थानीय निकायों के लिए, आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 4.4 लाख करोड़ रुपये और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपये की अनुशंसा की है। आयोग ने 308 निष्क्रिय राज्य सार्वजनिक उद्यमों (SPSEs) को बंद करने की सिफारिश भी की। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लू (हीटवेव) और बिजली गिरने को राष्ट्रीय आपदाओं के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की गई है, जिससे NDRF से राहत उपलब्ध होगी। RPSC/RAS परीक्षार्थियों के लिए वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित एक संवैधानिक निकाय है।