भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 23 मई 2026 को बताया कि वह वेतन से जुड़ी व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के एक प्रमुख प्रस्ताव की सक्रिय जाँच कर रहा है। इसके तहत, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अंशदान की तरह, म्यूचुअल फंड निवेशों की राशि सीधे कर्मचारी के वेतन से काटकर चुनी हुई म्यूचुअल फंड योजनाओं में भेजी जा सकती है। मंज़ूरी मिलने पर यह बदलाव म्यूचुअल फंड भागीदारी को केवल इच्छा पर लिए जाने वाले निर्णय से वेतन संरचना में शामिल नियमित वित्तीय व्यवहार में बदल देगा, जिसका घरेलू बचत, पूँजी बाज़ार के विस्तार और सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त बचत पर महत्वपूर्ण असर पड़ेगा। भारत में पहले से ही 10 करोड़ से अधिक म्यूचुअल फंड फ़ोलियो हैं और SIP मासिक प्रवाह हाल के महीनों में 26,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है, फिर भी इसकी पहुँच तुलनात्मक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बहुत कम है। वेतन से जुड़ी SIP के लिए नियोक्ताओं, EPFO, आयकर विभाग और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के साथ समन्वय आवश्यक होगा। साथ ही, कर्मचारी के नौकरी बदलने पर पोर्टेबिलिटी तथा सहमति और जोखिम प्रोफ़ाइलिंग से जुड़े सुरक्षा उपाय भी चाहिए होंगे। यह प्रस्ताव SEBI के अन्य सुधारों का पूरक है, जिनमें UPI-आधारित प्री-IPO निवेश, T+0 निपटान, निष्क्रिय फंडों के लिए म्यूचुअल फंड लाइट और उच्च-जोखिम रणनीतियों के लिए विशेषीकृत निवेश फंड शामिल हैं। SEBI, SEBI अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित एक सांविधिक नियामक है, जिसका काम निवेशक हितों की रक्षा करना, विकास को बढ़ावा देना और प्रतिभूति बाज़ार को नियंत्रित करना है। वर्तमान में इसकी अध्यक्षता तुहिन कांत पांडे करते हैं।