भारत ने 13 मार्च 2026 को जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय जैव विविधता रिपोर्ट (NBR-7) सौंपी। यह रिपोर्ट दिसंबर 2022 में अपनाए गए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे (GBF) के प्रति भारत की प्रगति को रेखांकित करती है।

Down to Earth के विश्लेषण ने 30x30 लक्ष्य — यानी 2030 तक 30% भूमि और समुद्री क्षेत्र को संरक्षित करने — को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। फिलहाल भारत के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क के दायरे में लगभग 5.3% भूभाग (997 संरक्षित क्षेत्रों में करीब 1,71,920 वर्ग किमी) ही आता है, जो 30% के लक्ष्य से बहुत दूर है। तीन प्रमुख संरचनात्मक बाधाएँ चिन्हित की गई हैं: जैव विविधता पर पर्याप्त आधारभूत डेटा का अभाव, केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार-क्षेत्र का टकराव, और नए संरक्षित क्षेत्रों की अधिसूचना की धीमी गति।

GBF का लक्ष्य-3 (30x30) वैश्विक जैव विविधता संरक्षण की आधारशिला माना जाता है। भारत की उपलब्धियों में प्रोजेक्ट टाइगर (58 टाइगर रिजर्व), गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों का पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम और कृषिवानिकी विस्तार शामिल हैं। फिर भी मौजूदा दायरे और 2030 लक्ष्य के बीच का अंतर विशाल है।

विशेषज्ञ OECM (अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय) की मान्यता में तेजी, विकेंद्रीकृत जैव विविधता निगरानी और जैव विविधता विरासत स्थलों को संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल करने की सिफारिश कर रहे हैं।