भारत में हिम तेंदुओं की पहली राष्ट्रीय जनगणना परीक्षा की दृष्टि से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हिमालयी पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण और शासन-तंत्र को एक साथ जोड़ती है। आधिकारिक आकलन के अनुसार देश में कुल 718 हिम तेंदुए दर्ज किए गए। इनमें लद्दाख 477 के साथ सबसे आगे है। इसके बाद उत्तराखंड में 124, हिमाचल प्रदेश में 51, अरुणाचल प्रदेश में 36, सिक्किम में 21 और जम्मू-कश्मीर में 9 हिम तेंदुए दर्ज किए गए।

यह आकलन 2019 से 2023 के बीच किया गया और इसके निष्कर्ष 30 जनवरी 2024 को जारी हुए। 23 अक्टूबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस के संदर्भ में यह आकलन फिर चर्चा में रहा। इससे करेंट अफ़ेयर्स में तथ्य, तारीख और क्षेत्रीय वितरण तीनों याद रखने योग्य बन जाते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टि से यह भारत में हिम तेंदुओं का पहला व्यवस्थित और वैज्ञानिक आकलन है। इसमें लगभग 1,20,000 वर्ग किलोमीटर ऊंचे हिमालयी आवास को कवर किया गया, जो संभावित क्षेत्र के 70% से अधिक हिस्से के बराबर है। पद्धति में मौजूदगी के संकेतों वाला नमूना सर्वे और अलग-अलग क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप से संख्या का अनुमान शामिल था। सर्वे टीमों ने 13,450 किलोमीटर ट्रांसेक्ट पर संकेतों का सर्वे किया, 1,971 स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए और लगभग 1,80,000 ट्रैप-नाइट्स से 241 अलग-अलग हिम तेंदुओं की पहचान की।

मुख्य परीक्षा में इससे जैव विविधता संरक्षण, उच्च हिमालयी आवास, वैज्ञानिक निगरानी, स्थानीय समुदायों की भूमिका और केंद्र-राज्य/केंद्रशासित प्रदेश समन्वय समझाया जा सकता है। हिम तेंदुआ वन्यजीव आवासों के विकास की केंद्र प्रायोजित योजना के प्रजाति पुनरुद्धार कार्यक्रम में शामिल 24 प्रजातियों में से एक है, इसलिए यह संरक्षण नीति का भी उपयोगी उदाहरण है।