नीति आयोग ने 21 जनवरी 2026 को सीमेंट, एल्युमीनियम और MSME क्षेत्रों के लिए तीन अलग-अलग डीकार्बनाइजेशन रोडमैप जारी किए। ये रोडमैप 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने की भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं और 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी लाने के NDC लक्ष्य के अनुरूप हैं।

सीमेंट क्षेत्र के रोडमैप में CCUS (कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण) तकनीक, रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF) का उपयोग और क्लिंकर प्रतिस्थापन जैसे उपाय शामिल हैं। वैश्विक ऊर्जा प्रणाली से होने वाले उत्सर्जन में सीमेंट का योगदान लगभग 6% है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक है।

एल्युमीनियम रोडमैप में 2070 तक उत्पादन क्षमता को मौजूदा 4 MT से बढ़ाकर 37 MT करने का लक्ष्य है। इसमें हरित हाइड्रोजन आधारित गलन, नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने और बेहतर पुनर्चक्रण बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है।

MSME रोडमैप में हरित वित्त तक पहुंच, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकी अपनाने और क्लस्टर स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों पर ध्यान दिया गया है। MSME क्षेत्र भारत की GDP में 30% योगदान देता है और 25 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार देता है।

ये रोडमैप नीति आयोग द्वारा उद्योग जगत, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और सरकारी मंत्रालयों के सहयोग से तैयार 23 क्षेत्रीय डीकार्बनाइजेशन योजनाओं का हिस्सा हैं।