पहली बार भारतीय नौसेना के पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी ने 23 अप्रैल 2026 को स्पेन के कनारी द्वीपसमूह की राजधानी लास पाल्मास के बंदरगाह पर लंगर डाला। किसी भी भारतीय नौसैनिक पोत की इस अटलांटिक चौकी की यह पहली यात्रा है। पत्र सूचना कार्यालय की विज्ञप्ति में पुष्टि की गई है कि यह पोर्ट कॉल पोत की चल रही अंतरमहासागरीय तैनाती लोकायन-26 का हिस्सा है, जो जनवरी 2026 में कोच्चि से शुरू हुई थी। लास पाल्मास पहुँचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ओमान के सलालाह, मिस्र के अलेक्जेंड्रिया, माल्टा के वैलेटा, फ्रांस के सेत और मोरक्को के कासाब्लांका में पेशेवर तथा सद्भावनापूर्ण पोर्ट कॉल कर चुकी है। इस दौरान उसने अरब सागर, भूमध्य सागर और पूर्वी अटलांटिक में हजारों समुद्री मील की यात्रा की। लास पाल्मास में ठहराव को एक रणनीतिक परिचालन विराम बताया जा रहा है, जिससे चालक दल को रसद भरने, आवश्यक रखरखाव करने तथा आगे होने वाले कठिन ट्रांस-अटलांटिक परिक्रमण की तैयारी का अवसर मिलेगा। लास पाल्मास में रहने के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर वरिष्ठ स्पेनिश नौसेना अधिकारियों तथा कनारी द्वीपसमूह के स्थानीय प्रशासन के साथ पेशेवर वार्ता करेंगे, और रक्षा मंत्रालय ने इस यात्रा को भारतीय नौसेना और स्पेनिश आर्मडा के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग का ठोस प्रदर्शन बताया है। स्पेन के बाद यह पोत अटलांटिक महासागर पार कर 2026 में अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगाँठ समारोहों में भारत की भागीदारी के अंग के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका के अनेक बंदरगाहों पर पहुँचेगा। यह तैनाती वसुधैव कुटुम्बकम का सभ्यतागत संदेश साथ ले जा रही है तथा भारत की ब्लू-वॉटर नौसैनिक पहुँच को दर्शाती है। 2012 में सेवा में शामिल हुई और कोच्चि में नियुक्त आईएनएस सुदर्शिनी एक तीन-मस्तूलीय बार्क है, जिसे मुख्यतः अधिकारी कैडेटों के पाल प्रशिक्षण, नौकौशल, नौवहन तथा नेतृत्व क्षमताओं के पारंपरिक विकास के लिए डिज़ाइन किया गया है।