16वें वित्त आयोग ने, जिसने 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत भारत की राष्ट्रीय अधिसूचित आपदाओं की सूची में हीटवेव और बिजली गिरने को शामिल करने की औपचारिक सिफारिश की। यह सिफारिश 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के बाद व्यापक सार्वजनिक चर्चा में आई और 2 फरवरी को नीति चर्चाओं में प्रमुख मुद्दा बनी रही।

आयोग ने 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) के लिए कुल ₹2,04,401 करोड़ का प्रावधान अनुशंसित किया है। इसमें से केंद्र का हिस्सा ₹1,55,915.85 करोड़ है, जबकि राज्यों को ₹48,485.15 करोड़ वहन करना होगा।

यह सिफारिश चिंताजनक मृत्यु दर के आंकड़ों पर आधारित है। 2018 से 2022 के बीच NCRB डेटा के अनुसार भारत में गर्मी या हीटवेव से 3,798 मौतें दर्ज की गईं। 2022 में अकेले बिजली गिरने से 2,887 मौतें हुईं — प्राकृतिक शक्तियों से होने वाली कुल 8,060 मौतों का 35.8%।

राजस्थान — थार रेगिस्तान क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी की घटनाओं से गंभीर रूप से प्रभावित राज्य और जनजातीय क्षेत्रों में बिजली गिरने से होने वाली मौतों के मामले बार-बार दर्ज करने वाला राज्य — इस नीतिगत बदलाव से सीधे लाभान्वित होगा।