प्रकाशित: 12 अक्टूबर 2025पर्यावरण
UNEP अनुकूलन गैप रिपोर्ट 2025: विकासशील देशों के लिए वैश्विक जलवायु वित्त की कमी बढ़ी
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 'रनिंग ऑन एम्प्टी' शीर्षक वाली अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 जारी की। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल ढालने के लिए आवश्यक धन और उपलब्ध धन के बीच वैश्विक अंतर तेज़ी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देशों में अनुकूलन की सालाना लागत 2030 तक 300-500 अरब अमेरिकी डॉलर पहुँच सकती है।
विकासशील देशों को मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक अनुकूलन वित्त 2023 में 26 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो ज़रूरत से बहुत कम है। रिपोर्ट ने अनुकूलन वित्त में भारी बढ़ोतरी करने, राष्ट्रीय योजनाओं में जलवायु जोखिमों को बेहतर ढंग से शामिल करने और प्रकृति-आधारित समाधान अपनाने पर ज़ोर दिया है। जलवायु जोखिम की दृष्टि से सबसे संवेदनशील देशों में शामिल भारत ने विकसित देशों से पेरिस समझौते के तहत जलवायु वित्त की अपनी प्रतिबद्धताएँ पूरी करने पर बल दिया है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजअंतरराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनों
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नकठिन
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2035 तक विकासशील देशों की अनुमानित वार्षिक अनुकूलन वित्त ज़रूरतों/लागतों को कौन-सी सीमा सबसे ठीक दिखाती है?
व्याख्या · सही उत्तर CUNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 के अनुसार विकासशील देशों में अनुकूलन वित्त की ज़रूरत/लागत 2035 तक मॉडल-आधारित अनुमान में लगभग 310 अरब डॉलर प्रति वर्ष और राष्ट्रीय जलवायु प्रतिज्ञाओं तथा राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं से निकाले गए अनुमान में लगभग 365 अरब डॉलर प्रति वर्ष हो सकती है। इसलिए दिए गए विकल्पों में 300-500 अरब डॉलर की सीमा सबसे उपयुक्त है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 में विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त के बारे में क्या कहा गया है?
**UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025** में बताया गया है कि विकासशील देशों के लिए **वैश्विक जलवायु वित्त का अंतर काफ़ी बढ़ गया है** और अनुकूलन के लिए मिलने वाला धन ज़रूरत से बहुत कम है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने की क्षमता बढ़ाने के लिए विकासशील देशों को **2035 तक हर साल 310 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक** की ज़रूरत है, लेकिन मौजूदा वित्तीय प्रवाह इसका केवल एक छोटा हिस्सा है।
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट क्या है और इसका 2025 का संस्करण कब जारी हुआ?
**UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का सालाना प्रकाशन है**, जिसमें जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने की दिशा में दुनिया की प्रगति का आकलन किया जाता है। 2025 के संस्करण ने **विकासशील देशों को अनुकूलन के लिए जितने धन की ज़रूरत है और विकसित देशों से उन्हें जितना जलवायु वित्त मिल रहा है, उनके बीच बढ़ते अंतर** को सामने रखा।
जलवायु अनुकूलन वित्त क्या है और UNEP की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार इसका अंतर क्यों बढ़ रहा है?
**जलवायु अनुकूलन वित्त वह धन है जो देशों को जलवायु परिवर्तन के मौजूदा और भावी प्रभावों के अनुरूप ढलने में मदद करता है**। इसका उपयोग बाढ़ से बचाव के उपाय करने, सूखा-रोधी खेती विकसित करने और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ बनाने जैसे कार्यों में होता है। UNEP की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशील विकासशील देशों में प्रभाव और लागत बढ़ रहे हैं, लेकिन **विकसित देशों की प्रतिबद्धताएँ उसी रफ़्तार से नहीं बढ़ रही हैं**; इसलिए यह अंतर बढ़ता जा रहा है।
UNEP की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार किन देशों के सामने जलवायु अनुकूलन की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं?
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 के अनुसार, **अल्प विकसित देश (LDCs), लघु द्वीपीय विकासशील देश (SIDS) और अफ्रीकी देश** सबसे गंभीर जलवायु अनुकूलन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ये देश **समुद्र-स्तर में वृद्धि, चरम मौसमी घटनाओं और खाद्य असुरक्षा के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील** हैं, फिर भी इन्हें अनुकूलन वित्त सबसे कम मिलता है।
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 में क्या नीतिगत सिफ़ारिशें की गई हैं?
UNEP की अनुकूलन अंतराल रिपोर्ट 2025 में **अनुकूलन वित्त तुरंत बढ़ाने, हानि-क्षति से निपटने के तंत्र मज़बूत करने और बहुपक्षीय जलवायु कोषों में सुधार करने** का आह्वान किया गया है। रिपोर्ट की सिफ़ारिश है कि **विकसित देश हर साल 100 अरब अमेरिकी डॉलर के जलवायु वित्त की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करें और उससे आगे बढ़ें** तथा शमन के बजाय अनुकूलन के लिए अधिक हिस्सा दें।