प्रकाशित: 21 जनवरी 2026टॉपिक
किश्तवाड़ के वनों में ऑपरेशन त्राशी-I तेज; J&K में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान
22 जनवरी 2026 को सुरक्षा बलों ने चौथे दिन ऑपरेशन त्राशी-I को और तेज किया। यह जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चत्रू क्षेत्र के घने जंगलों में कई दिनों तक चलने वाला आतंकवाद-रोधी अभियान है, जिसमें इलाके में नियंत्रण मजबूत करने पर भी जोर है। यह अभियान भारतीय सेना, J&K पुलिस (SOG सहित) और CRPF द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य किश्तवाड़ के वन क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी समूहों का पता लगाना, उन्हें निष्प्रभावी करना और नष्ट करना है। बलों ने 8,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हवाई निगरानी, खोजी कुत्ते और वन गश्ती दल तैनात किए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑपरेशन त्राशी-I क्या है और इसे कहाँ संचालित किया गया?
**ऑपरेशन त्राशी-I** **किश्तवाड़ जिले, जम्मू-कश्मीर** के जंगलों में चलाया जा रहा एक **संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियान** है। यह अभियान **भारतीय सेना, CRPF, J&K पुलिस और विशेष अभियान समूह (SOG)** के समन्वित प्रयासों से तेज़ हुआ। किश्तवाड़ के घने जंगल और पर्वतीय भूभाग ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान से जम्मू क्षेत्र तक आतंकवादी घुसपैठ के मार्गों को आड़ देते रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए किश्तवाड़ जिला महत्वपूर्ण क्यों है?
**किश्तवाड़ जिला** जम्मू क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके घने **हिमालयी जंगल और ऊंचाई वाले दर्रे** आतंकवादियों की आवाजाही को आड़ देते हैं। अनुच्छेद 370 के निरसन (2019) के बाद, सुरक्षा बलों ने जम्मू के पहाड़ी जिलों में अभियान तेज़ किए हैं।
जम्मू-कश्मीर में संचालित संयुक्त आतंकवाद-विरोधी ढांचा क्या है?
J&K में आतंकवाद-विरोधी अभियानों का **बहु-एजेंसी ढांचा** है, जिसमें **भारतीय सेना** (चिनार कोर और व्हाइट नाइट कोर), **CRPF**, **J&K पुलिस का SOG** (खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान), **BSF** (सीमा प्रबंधन), **IB** और **RAW** शामिल हैं। **ऑपरेशन त्राशी-I** जैसे अभियान एकीकृत कमान संरचनाओं के तहत चलने वाले इस संयुक्त दृष्टिकोण का उदाहरण हैं।
2020 के बाद जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद की वर्तमान स्थिति क्या है?
अनुच्छेद 370 के निरसन (2019) के बाद **जम्मू क्षेत्र** में, विशेष रूप से **राजौरी, पुंछ, रियासी, किश्तवाड़ और डोडा जिलों** में आतंकवाद में चिंताजनक वृद्धि हुई है। **TRF (The Resistance Front)** और **लश्कर-ए-तैयबा (LeT)** जैसे पाकिस्तान समर्थित समूहों ने जम्मू के हिंदू-बहुल क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है।
J&K में जंगल और पहाड़ी आतंकवाद-विरोधी अभियानों का राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्या महत्व है?
**J&K** में जंगलों और पहाड़ी इलाकों में चलने वाले आतंकवाद-रोधी अभियान नियंत्रण रेखा (LoC) से आतंकवादी **घुसपैठ** रोकने, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी रोकने तथा **ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क** को ध्वस्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारतीय सुरक्षा बलों को **पीर पंजाल रेंज** के जंगलों में विशेष **काउंटर-इन्सर्जेंसी** तकनीकों की आवश्यकता है।