प्रकाशित: 22 जनवरी 2026टॉपिक
किश्तवाड़ के जंगलों में ऑपरेशन त्राशी-I हुआ तेज़; जम्मू-कश्मीर में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान
22 जनवरी 2026 को सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन त्राशी-I के चौथे दिन कार्रवाई तेज़ कर दी। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चत्रू क्षेत्र के घने जंगलों में चल रहा यह कई दिनों का आतंकवाद-रोधी और इलाके पर नियंत्रण मज़बूत करने का अभियान है। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) इसे संयुक्त रूप से चला रहे हैं।
इस अभियान का उद्देश्य किश्तवाड़ के वन क्षेत्रों में सक्रिय आतंकवादी समूहों का पता लगाना, उन्हें निष्प्रभावी करना और खत्म करना है। सुरक्षा बलों ने 8,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले बड़े इलाके में हवाई निगरानी की व्यवस्था की और खोजी कुत्ते व वन गश्ती दल तैनात किए। सर्दियों के दौरान जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिशें और मुठभेड़ों की खबरें बढ़ने के बाद यह अभियान तेज़ किया गया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑपरेशन त्राशी-I क्या है और इसे कहाँ चलाया गया?
**ऑपरेशन त्राशी-I** **किश्तवाड़ जिले, जम्मू-कश्मीर** के जंगलों में चलाया जा रहा एक **संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान** है। **भारतीय सेना, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), जम्मू-कश्मीर पुलिस और विशेष अभियान समूह (SOG)** की समन्वित तलाशी के साथ यह अभियान तेज़ किया गया। किश्तवाड़ के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में आतंकवादियों को पाकिस्तान से जम्मू क्षेत्र आने वाले घुसपैठ मार्गों पर छिपने की जगह मिलती रही है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए किश्तवाड़ जिला महत्वपूर्ण क्यों है?
**किश्तवाड़ जिला** जम्मू क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके घने **हिमालयी जंगलों और ऊँचाई वाले दर्रों** में आतंकवादी छिपकर आवाजाही कर सकते हैं। इसकी सीमाएँ **डोडा और भद्रवाह** से लगती हैं, जहाँ पहले भी आतंकी गतिविधियाँ रही हैं। अनुच्छेद 370 के निरसन (2019) के बाद सुरक्षा बलों ने जम्मू के पहाड़ी जिलों में अभियान तेज़ किए हैं, जहाँ **पाकिस्तान-समर्थित आतंकी समूह** अपनी मौजूदगी बनाए रखने और नए रास्ते बनाने की कोशिश करते हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों का संयुक्त ढाँचा क्या है?
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए कई एजेंसियाँ साथ काम करती हैं। इनमें भारतीय सेना की **चिनार कोर** (कश्मीर में तैनात) और **व्हाइट नाइट कोर** (जम्मू में तैनात), कानून-व्यवस्था संभालने वाला **केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF)**, खुफ़िया जानकारी के आधार पर आतंकवाद-रोधी कार्रवाई करने वाला जम्मू-कश्मीर पुलिस का **विशेष अभियान समूह (SOG)**, सीमा प्रबंधन करने वाला **सीमा सुरक्षा बल (BSF)**, **खुफ़िया ब्यूरो (IB)** और सीमा-पार खुफ़िया जानकारी जुटाने वाली **अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (RAW)** शामिल हैं। **ऑपरेशन त्राशी-I** जैसे अभियान एकीकृत कमान के तहत चलने वाले इस संयुक्त तरीके का उदाहरण हैं।
2020 के बाद जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद की स्थिति क्या है?
अनुच्छेद 370 के निरसन (2019) के बाद **जम्मू क्षेत्र** में आतंकवाद चिंताजनक रूप से बढ़ा है, खासकर **राजौरी, पुंछ, रियासी, किश्तवाड़ और डोडा जिलों** में। **द रेज़िस्टेंस फ्रंट (TRF)** और **लश्कर-ए-तैयबा (LeT)** जैसे पाकिस्तान-समर्थित समूहों ने क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए जम्मू के हिंदू-बहुल इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया है। सुरक्षा बल हर महीने कई मुठभेड़ों तथा घेराबंदी और तलाशी अभियानों (CASO) को अंजाम दे रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के जंगलों और पहाड़ों में आतंकवाद-रोधी अभियानों का राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्या महत्व है?
जम्मू-कश्मीर के जंगलों और पहाड़ों में आतंकवाद-रोधी अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण हैं। इनसे नियंत्रण रेखा (LoC) के रास्ते होने वाली आतंकवादी **घुसपैठ** रोकने, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी पर रोक लगाने, आतंकियों के स्थानीय सहयोगियों के नेटवर्क (OGW) तोड़ने और बचे हुए आतंकी समूहों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए रखने में मदद मिलती है। आतंकवादी **पीर पंजाल पर्वतमाला** और हिमालयी जंगलों के कठिन भूभाग का फ़ायदा उठाते हैं, इसलिए भारतीय सुरक्षा बलों को आतंकवाद-रोधी और जंगल में युद्ध की विशेष तकनीकों की ज़रूरत होती है।