संसद की विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी समिति ने MoEF&CC की अनुदान मांगों पर अपनी 405वीं रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में AI, उपग्रह तस्वीरों और ड्रोन तकनीक से वन अग्नि की पहले से पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं।

समिति ने बार-बार लगने वाली वन आग पर गहरी चिंता व्यक्त की — विशेष रूप से उत्तराखंड में हाल के वर्षों में लगी भीषण आग का हवाला दिया, जिससे जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंची। समिति ने आग लगने के बाद की कार्रवाई के बजाय सक्रिय, प्रौद्योगिकी-आधारित रोकथाम प्रणाली अपनाने की तत्काल जरूरत बताई। रीयल-टाइम उपग्रह डेटा से जुड़ी AI-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लगाने की सिफारिश की गई, ताकि आग फैलने से पहले वन विभाग को सचेत किया जा सके।

अतिक्रमण के मुद्दे पर समिति ने अवैध कब्जे वाली 13,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन भूमि के ड्रोन सर्वेक्षण की सिफारिश की। व्यवस्थित ड्रोन मैपिंग से बेदखली कार्यवाही के लिए ठोस डिजिटल साक्ष्य मिलेगा।

रिपोर्ट में देश के सभी पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) की डिजिटल मैपिंग पर भी बल दिया गया। कई राज्यों में ESZ सीमाएं विवादित और अस्पष्ट हैं, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलता है। GIS एवं रिमोट सेंसिंग से पारदर्शी और कानूनी रूप से लागू सीमाएं तय होंगी।

ये सिफारिशें भारत की राष्ट्रीय वन अग्नि कार्य योजना (NAPFF) और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के अनुरूप हैं। मंत्रालय को तीन माह में कार्रवाई रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया।