11 अप्रैल 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई स्वीकार कर ली जिसमें उन 26 भारतीय नागरिकों की वापसी की मांग की गई है जिन्हें कथित रूप से एजेंटों ने रोज़गार और शैक्षिक अवसरों के झूठे वादों पर रूस भेजा और बाद में चल रहे रूस-यूक्रेन सशस्त्र संघर्ष में रूसी सेना के साथ काम करने के लिए मजबूर किया। एक खंडपीठ ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, रूस में भारत के राजदूत और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की कि इस प्रकार की छलपूर्ण भर्ती के कार्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अंतर्गत मानव तस्करी की श्रेणी में आ सकते हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रभावित भारतीय मुख्यतः केरल, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और गुजरात से हैं; कुछ घायल होने की सूचना है और कुछ की मृत्यु की आशंका जताई गई है। लापता नागरिकों के परिवारों द्वारा दायर याचिका में सरकार से अपील की गई है कि वह तत्काल प्रत्येक व्यक्ति का पता लगाए, उनकी कानूनी व स्वास्थ्य स्थिति सत्यापित करे और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए राजनयिक एवं कॉन्सुलर प्रयास करे। विदेश मंत्रालय पूर्व में कह चुका है कि कम से कम 126 भारतीय नागरिक सहायक भूमिकाओं में रूसी सेना के साथ काम कर रहे थे, जिनमें से 96 को मुक्त किया जा चुका है और 12 की मृत्यु हो चुकी है। न्यायालय के हस्तक्षेप से विदेशी संघर्ष क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों पर युद्ध के कानूनी और मानवीय प्रभाव सामने आए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने रूस-यूक्रेन युद्ध में कथित रूप से लड़ने को मजबूर किए गए 26 भारतीयों की वापसी पर केंद्र से जवाब मांगा
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2026 को केंद्र, विदेश मंत्रालय और रूस में भारत के राजदूत को उस याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें उन 26 भारतीयों की वापसी की मांग की गई है, जिनकी कथित रूप से तस्करी कर उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2026 को रूस-यूक्रेन युद्ध में कथित रूप से लड़ने को मजबूर किए गए 26 भारतीयों की वापसी की याचिका पर नोटिस जारी किया।
- न्यायालय ने इंगित किया कि एजेंटों द्वारा छलपूर्ण भर्ती भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मानव तस्करी की श्रेणी में आ सकती है।
- भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, रूस में भारत के राजदूत और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगे गए हैं।
- याचिका लापता भारतीयों के परिवारों ने दायर की है; अधिकांश पीड़ित केरल, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और गुजरात से हैं।
- विदेश मंत्रालय पहले पुष्टि कर चुका है कि कम से कम 126 भारतीय नागरिक रूसी सेना के साथ सहायक भूमिकाओं में काम कर रहे थे; 96 को मुक्त किया जा चुका है और 12 की मृत्यु हो चुकी है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 रूस-यूक्रेन संघर्ष के पीछे भू-राजनीतिक कारकों की विवेचना कीजिए। — दोनों रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रभाव से जुड़े हैं; यह लेख बलपूर्वक भर्ती 26 भारतीयों के मानवीय एवं कानूनी पहलुओं की जांच करता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: रूस-यूक्रेन युद्ध में कथित रूप से मजबूर 26 भारतीयों की वापसी पर सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के कानूनी एवं मानवीय आयामों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
11 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने एजेंटों द्वारा फुसलाए गए तथा कथित रूप से रूसी सेना के लिए लड़ने को मजबूर 26 भारतीयों की वापसी की याचिका पर केंद्र, विदेश मंत्रालय तथा रूस में भारत के राजदूत को नोटिस जारी किया। नागरिक केरल, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, गुजरात से; पहले 126 पुष्ट।
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11 अप्रैल 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित में से किससे संबंधित याचिका पर केंद्र, विदेश मंत्रालय और रूस में भारत के राजदूत को नोटिस जारी किया?
11 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका पर सुनवाई स्वीकार की। याचिका में उन 26 भारतीय नागरिकों की वापसी की मांग थी जिन्हें नौकरी और शिक्षा के झूठे वादों पर रूस ले जाया गया और यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के साथ सेवा करने को मजबूर किया गया। न्यायालय ने मामले को संभावित मानव तस्करी से जुड़ा माना और केंद्र, विदेश मंत्रालय तथा रूस में भारत के राजदूत को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
स्रोत: LiveLaw
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अप्रैल 2026 को क्या किया?
न्यायालय ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए केंद्र, विदेश मंत्रालय और रूस में भारत के राजदूत को नोटिस जारी किया। याचिका में रूस-यूक्रेन युद्ध में कथित रूप से लड़ने को मजबूर किए गए 26 भारतीयों की वापसी की मांग की गई है।
न्यायालय ने इसे मानव तस्करी का मामला क्यों माना?
क्योंकि याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि एजेंटों ने भारतीयों को नौकरी और शिक्षा के झूठे वादे कर धोखे से युद्ध में भेज दिया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत मानव तस्करी के स्वरूप से मेल खाता है।
विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर पहले क्या कहा है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार कम से कम 126 भारतीय नागरिक रूसी सेना के साथ सहायक भूमिकाओं में कार्यरत थे; 96 को मुक्त किया जा चुका है और 12 की मृत्यु हो चुकी है।
अधिकांश प्रभावित भारतीय किन राज्यों से हैं?
केरल, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और गुजरात।
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