नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने 28 अक्टूबर 2025 को "सेवा विषयगत श्रृंखला" के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी कीं, जिन्हें भारत की सेवा क्षेत्र नीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ये दोनों रिपोर्ट आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में सेवाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती हैं।
सेवा क्षेत्र अब भारत के सकल मूल्य वर्धन में लगभग 55% का योगदान देता है, जिससे यह भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। पिछले छह वर्षों में इस क्षेत्र ने लगभग 4 करोड़ नए रोजगार सृजित किए हैं, जो देश की बढ़ती श्रमशक्ति को समायोजित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका दिखाता है। रिपोर्ट में क्षेत्रीय रुझानों, प्रदर्शन मानकों और टिकाऊ विकास के लिए नीति सिफारिशों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष सेवा गतिविधियों का भौगोलिक संकेंद्रण है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना मिलकर सेवा उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा रखते हैं। यह अत्यधिक शहरीकृत राज्यों में सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त और व्यावसायिक सेवाओं जैसे आधुनिक, उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्रों के संकेंद्रण को दर्शाता है।
रिपोर्ट में गिग श्रमिक नीति का विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है, जो अब एक तत्काल आवश्यकता बन चुकी है। सिफारिशों में सामाजिक सुरक्षा ढांचा, कौशल विकास और विवाद समाधान तंत्र शामिल हैं। "सेवा विषयगत श्रृंखला" नियमित नीति दस्तावेज श्रृंखला के रूप में जारी रहेगी। ये रिपोर्ट भारत की सेवा प्रतिस्पर्धात्मकता का लाभ उठाकर निर्यात बढ़ाने और वैश्विक क्षमता केंद्रों व डिजिटल सेवाओं में विदेशी निवेश आकर्षित करने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप हैं।
