प्रकाशित: 10 मार्च 2026Al Jazeeraशासन
सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल कोमा में रहे हरीश राणा के लिए भारत की पहली निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति J.B. परडीवाला और K.V. विश्वनाथन की पीठ ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा (32) का लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी। उत्तर प्रदेश के निवासी हरीश 2013 में इमारत से गिरने के बाद से वानस्पतिक अवस्था में हैं। यह 2018 के कॉमन कॉज निर्णय के बाद भारत का पहला अदालत से अनुमोदित निष्क्रिय इच्छामृत्यु मामला है।
भारत में सक्रिय इच्छामृत्यु अवैध है, जबकि निष्क्रिय इच्छामृत्यु 2018 से कानूनी है। अरुणा शानबाग मामला (2011), कॉमन कॉज मामला (2018) और 2023 के सरलीकृत दिशानिर्देश प्रमुख मील के पत्थर हैं। हरीश को AIIMS पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: अनुच्छेद 21 के संदर्भ में 11 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हरीश राणा के लिए भारत की पहली निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति के आदेश का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
11 मार्च 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति पारदीवाला एवं विश्वनाथन पीठ ने 32-वर्षीय हरीश राणा, 2013 से वानस्पतिक अवस्था में, के लिए जीवन-रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति दी — 2018 कॉमन कॉज निर्णय, जिसने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत सम्मानपूर्वक मरने का अधिकार दिया, के बाद भारत की पहली न्यायालय-स्वीकृत निष्क्रिय इच्छामृत्यु।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयराष्ट्रीयपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतAl Jazeera
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जुड़ा प्रश्नकठिन
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने किस ऐतिहासिक मामले में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु को वैध किया?
व्याख्या · सही उत्तर Bअरुणा शानबाग मामले (2011) में भारत में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु को वैध किया गया। कॉमन कॉज फैसले (2018) ने गरिमा से मृत्यु के अधिकार को मान्यता दी। हरीश राणा (2026) 2018 ढाँचे के तहत निष्क्रिय इच्छामृत्यु का पहला न्यायालय-अनुमोदित मामला बना।