ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा 18 फरवरी 2026 को पाँच दिवसीय राजकीय यात्रा (18-22 फरवरी) पर नई दिल्ली पहुँचे। यह भारत और ब्राज़ील के बीच हाल के वर्षों में सबसे महत्त्वपूर्ण द्विपक्षीय संवाद है, जो ग्लोबल साउथ की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच बढ़ती रणनीतिक समानता को दर्शाता है।

शिखर सम्मेलन के एजेंडे में कई प्रमुख विषय शामिल हैं। पहला, खनिज सहयोग: भारत और ब्राज़ील दुर्लभ खनिजों — जैसे लिथियम, नियोबियम और कोबाल्ट — पर एक रूपरेखा MoU की संभावना तलाश रहे हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा उत्पादन के लिए ज़रूरी हैं। ब्राज़ील के पास विश्व के सबसे बड़े नियोबियम भंडार हैं, जो इसे भारत के सेमीकंडक्टर और EV बैटरी लक्ष्यों के लिए रणनीतिक साझेदार बनाता है।

दूसरा, AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था: दोनों देशों ने फरवरी 2026 के भारत AI शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा के अनुरूप AI शासन ढाँचे पर सहयोग करने पर सहमति जताई। फिनटेक, UPI-आधारित भुगतान एकीकरण और ओपन-सोर्स AI टूल्स पर संयुक्त डिजिटल साझेदारी पर चर्चा जारी है।

तीसरा, इस्पात और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला: ब्राज़ील लौह अयस्क निर्यात में अग्रणी है और भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है। दोनों पक्ष चीन-निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं को कम करने के लिए तरजीही व्यवस्थाएँ बना रहे हैं।

चौथा, जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा: यह यात्रा पेरिस समझौते और G20 ढाँचे के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं पर आधारित है। ब्राज़ील का अमेज़न संरक्षण और भारत का सौर ऊर्जा विस्तार परस्पर पूरक शक्तियाँ हैं।

द्विपक्षीय व्यापार अभी लगभग 12-14 अरब डॉलर सालाना है। 2030 तक 20-30 अरब डॉलर का साझा लक्ष्य आर्थिक जुड़ाव को लगभग दोगुना करने का प्रयास है। भारत ब्राज़ील को दवाइयाँ, मशीनरी और रसायन निर्यात करता है, जबकि ब्राज़ील कच्चा तेल, सोयाबीन और खनिज निर्यात करता है।

यह यात्रा बहुपक्षीय मंचों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है: दोनों देश BRICS सदस्य, G20 नेता और UNSC सहित सुधरे वैश्विक शासन संस्थानों के समर्थक हैं।