भारतीय तटरक्षक ने मुंबई में आरपीआरईएक्स-2025 क्षेत्रीय प्रदूषण-प्रतिक्रिया अभ्यास आयोजित किया। इसका उद्देश्य समुद्र में तेल रिसाव जैसी आपदा से निपटने की तैयारी परखना था। यह अभ्यास राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिकता योजना के अनुरूप किया गया, इसलिए परीक्षा में इससे रक्षा तैयारी के साथ समुद्री पर्यावरण सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संस्थागत समन्वय को भी जोड़ा जा सकता है।

अभ्यास में एक ऐसी स्थिति बनाई गई जिसमें टक्कर के बाद समुद्र में तेल रिसाव हुआ। इस काल्पनिक संकट से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक का एक विशेष प्रदूषण-नियंत्रण पोत और दो अतिरिक्त तटरक्षक पोत प्रदूषण-प्रतिक्रिया विन्यास में तैनात किए गए। इससे यह देखा गया कि समुद्री तेल प्रदूषण के समय प्रतिक्रिया कितनी तेज़, समन्वित और व्यावहारिक हो सकती है। अभ्यास में मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण और ओएनजीसी जैसे हितधारक भी शामिल थे, जो ऐसे अभ्यासों में बंदरगाह और तेल-क्षेत्र से जुड़े संगठनों की भूमिका को रेखांकित करता है। इस तरह के अभ्यास वास्तविक आपदा आने से पहले जिम्मेदार एजेंसियों की तैयारी, संचार और संसाधन-तैनाती को जांचने का व्यावहारिक तरीका बनते हैं।

प्रीलिम्स के लिए मुख्य तथ्य हैं: आयोजक भारतीय तटरक्षक, स्थान मुंबई तट, अभ्यास का नाम आरपीआरईएक्स-2025, उद्देश्य समुद्र में तेल रिसाव से निपटने की तैयारी और संदर्भ राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिकता योजना। मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से इसे समुद्री सुरक्षा, पर्यावरणीय जोखिम, तटीय शासन और आपदा-प्रतिक्रिया तंत्र के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है। स्टैटिक जीके में भारतीय तटरक्षक की भूमिका, समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और तेल रिसाव से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान जैसे बिंदु इससे सीधे जुड़ते हैं।