विकसित भारत — गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 [VB-G RAM G Act] ने 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद आधिकारिक रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) की जगह ली। विधेयक 16 दिसंबर को लोकसभा में पेश हुआ और विपक्ष के विरोध तथा वॉकआउट के बीच 18 दिसंबर को संसद ने इसे पारित किया। इस ऐतिहासिक कानून ने ग्रामीण रोजगार गारंटी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया: ग्रामीण परिवार की वार्षिक रोजगार पात्रता मनरेगा के 100 दिन से बढ़कर 125 दिन हो गई। एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव अकुशल मजदूरी लागत के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 लागत-साझाकरण व्यवस्था है — मनरेगा से अलग, जहाँ केंद्र सरकार 100% अकुशल मजदूरी लागत वहन करती थी। नई योजना के कार्य चार विषयगत क्षेत्रों में व्यवस्थित हैं: (i) जल सुरक्षा, (ii) ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, (iii) आजीविका संबंधी बुनियादी ढाँचा, और (iv) अत्यधिक मौसम घटनाओं का शमन। यह योजना 'विकसित भारत 2047' दृष्टि के अंतर्गत स्पष्ट रूप से तैयार की गई है। आलोचकों का तर्क है कि 40% राज्य लागत-साझाकरण से वित्तीय दृष्टि से कमजोर राज्यों पर अनुपात से अधिक बोझ पड़ेगा। राजस्थान, जिसके पास भारत में सर्वाधिक मनरेगा श्रमिक हैं, नए लागत-साझाकरण मॉडल से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक होगा।
VB-G RAM G अधिनियम 2025 ने MGNREGA की जगह ली: ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार गारंटी, नई व्यवस्था में राज्य 40% लागत साझा करेंगे
विकसित भारत — गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 [VB-G RAM G Act] ने 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) की जगह आधिकारिक रूप से ले ली। विधेयक 16 दिसंबर को लोकसभा में पेश हुआ और विपक्ष के विरोध और वॉकआउट के बीच 18 दिसंबर को संसद ने इसे पारित किया। इस ऐतिहासिक कानून से ग्रामीण रोजगार गारंटी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई: ग्रामीण परिवार की वार्षिक रोजगार पात्रता मनरेगा के 100 दिन से बढ़कर 125 दिन हो गई। एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन यह है कि अकुशल मजदूरी की लागत केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 अनुपात में बांटी जाएगी — मनरेगा से अलग, जहाँ केंद्र सरकार अकुशल मजदूरी की 100% लागत वहन करती थी। नई योजना के कार्यों को चार क्षेत्रों में रखा गया है: (i) जल सुरक्षा, (ii) ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, (iii) आजीविका संबंधी बुनियादी ढाँचा, और (iv) अत्यधिक मौसम की घटनाओं का शमन। यह योजना 'विकसित भारत 2047' दृष्टि के अंतर्गत स्पष्ट रूप से तैयार की गई है। आलोचकों का तर्क है कि 40% राज्य लागत वहन करने से वित्तीय दृष्टि से कमजोर राज्यों पर अनुपातहीन बोझ पड़ेगा। राजस्थान, जिसके पास भारत में सर्वाधिक मनरेगा श्रमिक हैं, लागत बांटने के नए मॉडल से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक होगा।
मुख्य तथ्य
- VB-G RAM G अधिनियम 2025 ने 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद मनरेगा की जगह ली।
- ग्रामीण परिवारों की रोजगार गारंटी मनरेगा के 100 दिन से बढ़कर 125 दिन हो गई।
- अकुशल मजदूरी के लिए मनरेगा की 100% केंद्रीय फंडिंग की जगह 60:40 केंद्र-राज्य साझेदारी आई।
- कार्य चार क्षेत्रों में हैं: जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, आजीविका और अत्यधिक मौसम के प्रभावों को कम करना।
- आलोचकों का कहना है कि 40% राज्य हिस्सेदारी वित्तीय रूप से कमजोर राज्यों पर बोझ डालेगी।
- सर्वाधिक मनरेगा श्रमिकों वाला राजस्थान लागत बाँटने के नए मॉडल से सबसे अधिक प्रभावित होगा।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025 द्वारा मनरेगा की जगह लेने, 125-दिन गारंटी, 60:40 लागत-साझाकरण बदलाव, कार्य के विषयगत क्षेत्रों एवं राजस्थान के ग्रामीण श्रमिक वर्ग पर प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 दिसंबर 2025 को वीबी-जी रैम जी अधिनियम को मंजूरी दी, जो 1 जुलाई 2026 से मनरेगा का स्थान लेगा। परिवार की वार्षिक गारंटी 100 से 125 दिन हुई। केंद्र-राज्य लागत 60:40 बंटी। यह जल सुरक्षा, ग्रामीण ढांचा, आजीविका एवं मौसम शमन—इन चार विषयों पर केंद्रित है और राजस्थान के बड़े श्रमिक वर्ग को प्रभावित करेगा।
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VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के तहत अधिकांश राज्यों में मजदूरी और योजना-लागत के लिए केंद्र-राज्य हिस्सेदारी का पैटर्न क्या है?
PRS के अनुसार VB-G RAM G व्यवस्था में कार्यक्रम को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया गया है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों में मजदूरी, सामग्री लागत और प्रशासनिक लागत के लिए केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60:40 है; पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में यह 90:10 है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
VB-G RAM G अधिनियम 2025 क्या है और इसने किस पहले के कानून की जगह ली?
VB-G RAM G अधिनियम 2025 (विकसित भारत — गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025) ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (मनरेगा) की जगह ली। इसे 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति मिली।
VB-G RAM G अधिनियम 2025 ग्रामीण परिवारों को कितने दिन के रोजगार की गारंटी देता है?
VB-G RAM G अधिनियम 2025 ने ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार गारंटी को मनरेगा के 100 दिन से बढ़ाकर प्रति वर्ष 125 दिन कर दिया है।
मनरेगा की तुलना में VB-G RAM G अधिनियम 2025 में लागत में हिस्सेदारी का नया मॉडल क्या है?
मनरेगा में अकुशल मजदूरी का 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। VB-G RAM G अधिनियम 2025 में 60:40 केंद्र-राज्य लागत हिस्सेदारी मॉडल लागू हुआ है, जिसमें राज्यों को अकुशल मजदूरी का 40% वहन करना होगा।
VB-G RAM G अधिनियम 2025 के तहत कार्य की चार श्रेणियाँ कौन सी हैं?
VB-G RAM G अधिनियम 2025 के तहत कार्य चार क्षेत्रों में रखे गए हैं: जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा, आजीविका संवर्धन और अत्यधिक मौसम शमन।
VB-G RAM G अधिनियम 2025 राजस्थान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण क्यों है?
राजस्थान सर्वाधिक मनरेगा श्रमिकों वाले राज्यों में से एक है, इसलिए नए 60:40 लागत हिस्सेदारी मॉडल में यह सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में होगा। वित्तपोषण में यह बदलाव राजस्थान की ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता पर दबाव डाल सकता है।
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