केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंज़ूरी दी है। मिशन का कुल परिव्यय बढ़ाकर ₹8.69 लाख करोड़ किया गया है। इसमें केंद्र का ₹1.51 लाख करोड़ का अतिरिक्त हिस्सा शामिल है, जिससे केंद्रीय सहायता ₹2.08 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.59 लाख करोड़ हो गई है। जल जीवन मिशन 2.0 में बुनियादी ढाँचा बनाने के बजाय उपयोगिता-आधारित सेवाएँ देने पर ज़ोर दिया गया है। इसके तहत 'सुजलम भारत' नाम का राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा शुरू किया गया है। यह हर गाँव को एक विशिष्ट सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र पहचान संख्या देता है और पेयजल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था का स्रोत से नल तक डिजिटल नक्शा तैयार करता है। वर्तमान में 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.80 करोड़ (81.6%) के पास नल जल कनेक्शन हैं। दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%) को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया, कुल परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ किया
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹8.69 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया। स्रोत से नल तक जलापूर्ति का नक्शा तैयार करने के लिए सुजलम भारत डिजिटल ढाँचा शुरू किया गया।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और कुल परिव्यय बढ़ाकर ₹8.69 लाख करोड़ करने की मंज़ूरी दी।
- केंद्र के ₹1.51 लाख करोड़ के अतिरिक्त हिस्से से केंद्रीय सहायता ₹2.08 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.59 लाख करोड़ हो गई।
- जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलम भारत नाम का राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा शुरू किया गया। यह हर गाँव को एक विशिष्ट सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र पहचान संख्या देता है और जलापूर्ति की पूरी व्यवस्था का स्रोत से नल तक नक्शा तैयार करता है।
- वर्तमान में 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.80 करोड़ (81.6%) के पास नल जल कनेक्शन हैं।
- दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%) को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने, इसका परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ करने और सुजलम भारत के उपयोगिता-आधारित ढाँचे की ओर बढ़ने का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर इसका परिव्यय ₹8.69 लाख करोड़ किया। केंद्र का हिस्सा ₹1.51 लाख करोड़ बढ़ने से केंद्रीय सहायता ₹2.08 लाख करोड़ से ₹3.59 लाख करोड़ हो गई। सुजलम भारत हर गाँव को विशिष्ट सुजल गाँव पहचान संख्या देता है। लक्ष्य सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%) को नल जल कनेक्शन देना है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा औद्योगिक पार्कों के लिए स्वीकृत भाव्या योजना का कुल परिव्यय कितना है?
केंद्रीय कैबिनेट ने पूरे भारत में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए BHAVYA योजना को ₹33,660 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी।
स्रोत: PMIndia
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत शुरू किया गया सुजलम भारत डिजिटल ढाँचा क्या है और इसे कब मंज़ूरी दी गई?
**सुजलम भारत** जल जीवन मिशन 2.0 के तहत शुरू किया गया राष्ट्रीय डिजिटल ढाँचा है, जिसे **केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026** को मंज़ूरी दी। यह हर गाँव को एक विशिष्ट **सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र पहचान संख्या** देता है, ताकि पेयजल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था का **स्रोत से नल तक** डिजिटल नक्शा तैयार किया जा सके। जल जीवन मिशन 2.0 का परिव्यय **₹8.69 लाख करोड़** है और यह **दिसंबर 2028** तक चलेगा।
मार्च 2026 में मंज़ूर जल जीवन मिशन 2.0 के लिए केंद्रीय सहायता में कितनी वृद्धि की गई?
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूरी मिलने के बाद **जल जीवन मिशन 2.0** के लिए केंद्रीय सहायता में **₹1.51 लाख करोड़** की वृद्धि हुई और यह **₹2.08 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.59 लाख करोड़** हो गई। मिशन का कुल परिव्यय **₹8.69 लाख करोड़** है। इसे **दिसंबर 2028** तक बढ़ाया गया है और तब तक सभी **19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%)** को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
मार्च 2026 तक जल जीवन मिशन के तहत भारत के कितने प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन मिला है?
**मार्च 2026** तक जल जीवन मिशन के तहत **19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.80 करोड़ (81.6%)** के पास नल जल कनेक्शन हैं। मिशन की शुरुआत **अगस्त 2019** में हुई थी, जब केवल **3.23 करोड़ परिवारों (16.87%)** के पास ऐसे कनेक्शन थे। मार्च 2026 में मंज़ूर जल जीवन मिशन 2.0 का परिव्यय **₹8.69 लाख करोड़** है और इसका लक्ष्य **दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%)** को नल जल कनेक्शन देना है।
सुजल गाँव पहचान संख्या क्या है और जल जीवन मिशन 2.0 में यह कैसे काम करती है?
**सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र पहचान संख्या** जल जीवन मिशन 2.0 के सुजलम भारत ढाँचे के तहत हर गाँव को दी जाने वाली विशिष्ट डिजिटल पहचान है। इसकी मदद से पेयजल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था का **स्रोत से नल तक** डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। यह नागरिक-केंद्रित व्यवस्था जल की गुणवत्ता, नल कनेक्शन की स्थिति और सेवा वितरण की निगरानी में मदद करती है। इसके साथ मिशन का ज़ोर बुनियादी ढाँचा बनाने से हटकर उपयोगिता-आधारित सेवा देने पर हो जाता है।
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत कितने ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य है और इसे कब तक हासिल करना है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंज़ूर और **दिसंबर 2028** तक बढ़ाए गए **जल जीवन मिशन 2.0** का लक्ष्य सभी **19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों (100%)** को नल जल कनेक्शन देना है। मार्च 2026 तक **15.80 करोड़ परिवारों (81.6%)** के पास कनेक्शन थे। केंद्रीय सहायता **₹2.08 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹3.59 लाख करोड़** की गई और कुल परिव्यय **₹8.69 लाख करोड़** रखा गया।
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