DRDO ने चांदीपुर, ओडिशा स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से प्रलय मिसाइलों का सफल साल्वो प्रक्षेपण किया। परीक्षण में एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलें दागी गईं और यह उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण था। साल्वो प्रक्षेपण का अर्थ है कि कम समय में एक से अधिक मिसाइलों को दागकर प्रणाली की त्वरित प्रतिक्रिया और बहु-मिसाइल तैनाती क्षमता को परखा गया। परीक्षा के लिए यह तथ्य भारत की स्वदेशी मिसाइल क्षमता, सैन्य तैयारी और मिसाइल तकनीक से जुड़े स्टैटिक जीके को सीधे जोड़ता है।

प्रलय ठोस ईंधन वाली, अर्ध-बैलिस्टिक, सतह-से-सतह मिसाइल है। इसकी रेंज 150-500 किमी और पेलोड 500-1,000 किग्रा है। यह उन्नत जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करती है। इसे अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद ने एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी के सहयोग से विकसित किया। प्रलय को 2015 में स्वीकृति मिली थी और यह 2011 के प्रहार परीक्षण से विकसित हुई।

परीक्षा की दृष्टि से इस विषय से प्रीलिम्स में मिसाइल का प्रकार, रेंज, पेलोड, प्रक्षेपण स्थल, लॉन्चर से जुड़ी विशेषता और विकसित करने वाली DRDO प्रयोगशालाओं पर सीधे प्रश्न बन सकते हैं। इसलिए याद रखने योग्य मूल बिंदु हैं: चांदीपुर का परीक्षण, एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलें, 150-500 किमी रेंज, 500-1,000 किग्रा पेलोड, ठोस ईंधन और अर्ध-बैलिस्टिक सतह-से-सतह प्रोफाइल।