भारत और नेपाल ने 25 फ़रवरी 2026 को नई दिल्ली में वनों, वन्यजीव, पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और नेपाल सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों देश परिदृश्य स्तर पर जैव विविधता संरक्षण रणनीतियाँ तैयार करेंगे, जिनमें साझा प्रमुख प्रजातियों — हाथी, गंगा डॉल्फ़िन, एक-सींग वाला गैंडा, हिम तेंदुआ, बाघ और गिद्ध — पर विशेष ध्यान रहेगा। एमओयू में वन एवं संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन को सशक्त बनाना, वन्यजीव गलियारों और आपसी संपर्क वाले क्षेत्रों की बहाली, ताकि सीमापार संरक्षण परिदृश्य विकसित किए जा सकें, वन एवं वन्यजीव अपराध से निपटना, प्रवर्तन एजेंसियों के अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की क्षमता बढ़ाना, तथा जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में स्मार्ट हरित अवसंरचना को बढ़ावा देने के प्रावधान हैं। इसमें ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान की बात भी शामिल है, साथ ही जैव विविधता संरक्षण के उभरते खतरों से निपटने पर भी जोर दिया गया है। भारत और नेपाल की 1,751 किमी की खुली सीमा वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व, दुधवा टाइगर रिज़र्व, चितवन राष्ट्रीय उद्यान और शुक्लाफाँटा राष्ट्रीय उद्यान जैसे संरक्षित क्षेत्रों से लगती है, इसलिए सीमा पार आवाजाही करने वाली प्रजातियों के लिए गलियारों की कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह समझौता मौजूदा द्विपक्षीय ढाँचों पर आधारित है और इससे तराई आर्क लैंडस्केप पहल को गहरा करने, कैलाश सैक्रेड लैंडस्केप सहयोग को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र में साझा पारिस्थितिकी तंत्र एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में योगदान मिलने की अपेक्षा है।