एशियाई विकास बैंक ने तेलंगाना में मूसी रिवरफ्रंट विकास के पहले चरण के लिए ₹4,100 करोड़, यानी लगभग 50 करोड़ डॉलर, का ऋण मंजूर किया है। यह घोषणा तेलंगाना के उद्योग मंत्री डी श्रीधर बाबू ने 2 जनवरी 2026 को की थी। पहले चरण में गंडीपेट से बापू घाट तक जोन 1 का 21 किमी हिस्सा शामिल है, जबकि पूरी परियोजना 5 जोन में 55 किमी तक फैली है। इसे मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड लागू करेगा। 31 मार्च 2026 तक लागत तय होने के बाद पहले चरण के काम शुरू होने हैं।

परीक्षा में इससे शहरी नदी पुनर्जीवन, बाढ़ प्रबंधन, सीवेज उपचार, हरित शहरी क्षेत्र और नदी किनारे आधारित आर्थिक गतिविधियों को एक साथ समझा जा सकता है। हैदराबाद जैसे बड़े शहरी क्षेत्र में नदी के इर्द-गिर्द पारिस्थितिक स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक गलियारे का विकास शासन और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण उदाहरण बनता है। परियोजना में रिवरफ्रंट पार्क, शहरी हरित क्षेत्र और पैदल चलने वालों के लिए रास्ते जैसे घटक बताए गए हैं। अहमदाबाद का साबरमती रिवरफ्रंट और कोटा का चंबल रिवरफ्रंट तुलनात्मक मॉडल के रूप में याद रखे जा सकते हैं, लेकिन मूसी परियोजना का मुख्य तथ्य तेलंगाना, 21 किमी का पहला चरण, 55 किमी की कुल लंबाई और ₹4,100 करोड़ का ऋण है।

RAS और UPSC की तैयारी में प्रीलिम्स के लिए यह पूछा जा सकता है कि किस संस्था ने ऋण दिया, परियोजना किस राज्य में है, ऋण राशि कितनी है, कौन-सा चरण शामिल है और कार्यान्वयन निकाय कौन है। मुख्य परीक्षा में यह शहरी नियोजन, नदी प्रदूषण नियंत्रण, सार्वजनिक अवसंरचना, पर्यावरणीय पुनरुद्धार और शहरी नदी विकास से जुड़ी शासन संबंधी बहसों से जुड़ सकता है। इसलिए इसे केवल एक वित्तीय मंजूरी की तरह नहीं, बल्कि नदी-आधारित शहरी विकास के केस स्टडी के रूप में पढ़ना उपयोगी है।