औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 को 16 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। यह भारत के श्रम कानून सुधारों में एक ऐतिहासिक कदम है। इस संशोधन से तीन पुराने श्रम कानून निरस्त होते हैं: ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 — ये कानून दशकों से भारत के श्रम परिदृश्य को नियंत्रित करते रहे थे।\n\n2026 का संशोधन औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के प्रावधानों को एक जगह लाकर उन्हें अपडेट करता है। यह संहिता भारत के बिखरे हुए श्रम कानून ढाँचे को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाई गई चार श्रम संहिताओं में से एक है (अन्य तीन हैं — वेतन संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता 2020)।\n\nसंशोधन में एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक प्रावधान यह है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य जाँच का प्रावधान किया गया है — पहली बार भारत की औपचारिक श्रम कल्याण प्रणाली में निवारक स्वास्थ्य का पहलू जोड़ा गया है।\n\nट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 — एक शताब्दी पुराने कानून — का निरस्तीकरण विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि इससे ट्रेड यूनियन की मान्यता, पंजीकरण और सामूहिक सौदेबाजी के मानदंड एक आधुनिक ढाँचे में आ जाते हैं। RAS अभ्यर्थियों के लिए यह विषय राजनीति-शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय — तीनों दृष्टियों से प्रासंगिक है।