प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में 2025 के संशोधन के तहत 1 जुलाई 2025 से उत्पादक, आयातक और ब्रांड मालिक नियम 11 में माँगी गई जानकारी तीन तरीकों में से किसी एक से दे सकते हैं: प्लास्टिक पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड छापकर, उत्पाद सूचना विवरणिका के ज़रिए, या पैकेजिंग पर वैधानिक विशिष्ट संख्या छापकर। विस्तारित उत्पादक ज़िम्मेदारी के तहत श्रेणी-1 पैकेजिंग में 2025-26 में 30% पुनर्चक्रित प्लास्टिक होना ज़रूरी है। यह मात्रा 2028-29 से बढ़कर 60% हो जाएगी। भारत में हर साल लगभग 93 लाख टन प्लास्टिक से प्रदूषण होता है। उल्लंघन पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम की धारा 15 के तहत प्रशासनिक दंड लगाया जाता है। जहाँ किसी उल्लंघन के लिए अलग दंड तय नहीं है, वहाँ दंड ₹10,000 से ₹15 लाख तक है; कंपनियों के लिए यह सीमा ₹1 लाख से ₹15 लाख है। पुनर्चक्रण के लक्ष्य श्रेणी के अनुसार अलग हैं: श्रेणी-1 और श्रेणी-4 के लिए 2027-28 से 80%, जबकि श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के लिए 60%।