NITI आयोग ने भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर एक व्यापक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट विद्यार्थियों के आवागमन में साफ असमानता बताती है: भारत आने वाले हर 1 विदेशी छात्र के मुकाबले लगभग 28 भारतीय छात्र विदेश में पढ़ते हैं — आवक-जावक अनुपात लगभग 1:28 है। यह असंतुलन दिखाता है कि भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में उभरने में अभी कई चुनौतियाँ हैं।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और अनुशंसाएँ:

1. छात्र आवागमन का अंतर (1:28 अनुपात): भारत प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख छात्र विदेश भेजता है (मुख्यतः अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया), लेकिन भारत में केवल लगभग 47,000 अंतर्राष्ट्रीय छात्र आते हैं।

2. इरास्मस+ जैसा विनिमय कार्यक्रम: रिपोर्ट EU के इरास्मस+ कार्यक्रम के भारतीय समतुल्य की अनुशंसा करती है — एक संरचित, सरकार द्वारा वित्तपोषित द्विपक्षीय ढाँचा।

3. 22 नीतिगत हस्तक्षेप: दोहरे/संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, वीज़ा नियमों का सरलीकरण, अंतर्राष्ट्रीय छात्र केंद्र, अनुसंधान निधि में वृद्धि, और चुनिंदा देशों में भारत अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय परिसर।

4. NEP 2020 से तालमेल: सभी अनुशंसाएँ NEP 2020 में वैश्विक अनुसंधान साझेदारी, दोहरी डिग्री और अंतर्राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक भर्ती से जुड़ी दिशा पर आधारित हैं।

रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीयकरण को उच्च शिक्षा निर्यात से विदेशी मुद्रा आय के आर्थिक अवसर के रूप में भी देखती है और भारत के वैश्विक प्रभाव के लिए सॉफ्ट पावर के साधन के रूप में भी।