सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार की 2007 की उस वैट अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जिसके तहत राजस्थान में निर्मित एस्बेस्टस सीमेंट शीट और ईंटों की बिक्री को कर-छूट दी गई थी। यह छूट स्थानीय निर्माताओं तक सीमित थी; अधिसूचना संख्या एस.ओ.377 दिनांक 09.03.2007 थी और लाभ उन उत्पादों से जुड़ा था जिनमें फ्लाई ऐश 25% या अधिक थी। बाहर के राज्यों से आने वाले समान माल पर वैट लगता रहा, इसलिए स्थानीय माल को कीमत और प्रतिस्पर्धा में अलग लाभ मिल सकता था।

न्यायालय ने माना कि ऐसी छूट संविधान के अनुच्छेद 304(a) के विरुद्ध है। यह प्रावधान राज्य विधानमंडल को दूसरे राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों से आए माल पर कर लगाने की अनुमति देता है, पर शर्त यह है कि समान स्थानीय माल पर भी वैसा ही कर लगे और बाहर से आए माल और स्थानीय माल के बीच भेदभाव न हो। इसी कारण यह फैसला केवल एक कर विवाद नहीं है; यह भारत के साझा बाजार और अनुच्छेद 301 के तहत व्यापार, वाणिज्य और आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा संवैधानिक मुद्दा है।

RAS और UPSC की तैयारी में यह केस दिखाता है कि केंद्र-राज्य आर्थिक संबंधों और संघीय ढांचे में राज्य कराधान की सीमा कहां तय होती है। परीक्षा के दृष्टिकोण से मुख्य बात यह है कि राज्य स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कर नीति बना सकते हैं, लेकिन ऐसी नीति समान माल के साथ भेदभाव करके दूसरे राज्यों के माल के लिए राजकोषीय बाधा नहीं बना सकती। स्टैटिक जीके में इसे संविधान के भाग XIII, अनुच्छेद 301 से 304 और कराधान में समानता के सिद्धांत से जोड़कर पढ़ना चाहिए।