प्रकाशित: 28 सितंबर 2025समाचार स्रोतटॉपिक
सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान की एस्बेस्टस पर VAT छूट को भेदभावपूर्ण घोषित किया
सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान सरकार की 2007 की उस वैट अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जिसके तहत राजस्थान में निर्मित एस्बेस्टस सीमेंट शीट और ईंटों की बिक्री को कर-छूट दी गई थी। यह छूट स्थानीय निर्माताओं तक सीमित थी; अधिसूचना संख्या एस.ओ.377 दिनांक 09.03.2007 थी और लाभ उन उत्पादों से जुड़ा था जिनमें फ्लाई ऐश 25% या अधिक थी। बाहर के राज्यों से आने वाले समान माल पर वैट लगता रहा, इसलिए स्थानीय माल को कीमत और प्रतिस्पर्धा में अलग लाभ मिल सकता था।
न्यायालय ने माना कि ऐसी छूट संविधान के अनुच्छेद 304(a) के विरुद्ध है। यह प्रावधान राज्य विधानमंडल को दूसरे राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों से आए माल पर कर लगाने की अनुमति देता है, पर शर्त यह है कि समान स्थानीय माल पर भी वैसा ही कर लगे और बाहर से आए माल और स्थानीय माल के बीच भेदभाव न हो। इसी कारण यह फैसला केवल एक कर विवाद नहीं है; यह भारत के साझा बाजार और अनुच्छेद 301 के तहत व्यापार, वाणिज्य और आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा संवैधानिक मुद्दा है।
RAS और UPSC की तैयारी में यह केस दिखाता है कि केंद्र-राज्य आर्थिक संबंधों और संघीय ढांचे में राज्य कराधान की सीमा कहां तय होती है। परीक्षा के दृष्टिकोण से मुख्य बात यह है कि राज्य स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कर नीति बना सकते हैं, लेकिन ऐसी नीति समान माल के साथ भेदभाव करके दूसरे राज्यों के माल के लिए राजकोषीय बाधा नहीं बना सकती। स्टैटिक जीके में इसे संविधान के भाग XIII, अनुच्छेद 301 से 304 और कराधान में समानता के सिद्धांत से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
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एस्बेस्टस पर राजस्थान की वैट छूट पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय किस व्यापक सिद्धांत को सुदृढ़ करता है?
व्याख्या · सही उत्तर Dयह फैसला भारत के साझा बाजार में मुक्त व्यापार के सिद्धांत को मजबूत करता है। साथ ही, वह उन संरक्षणवादी राज्य कर-नीतियों पर रोक लगाता है जो अंतरराज्यीय वाणिज्य को विकृत करती हैं। इससे देश के एकीकृत आंतरिक बाजार की सुरक्षा होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान की किस वैट नीति को निरस्त किया?
न्यायालय ने 2007 की उस वैट अधिसूचना को निरस्त किया, जिसके तहत राजस्थान में निर्मित एस्बेस्टस सीमेंट शीट और ईंटों को कर-छूट दी गई थी, जबकि दूसरे राज्यों से आए समान माल पर वैट लागू रहता था।
यह छूट अनुच्छेद 304(a) के विरुद्ध क्यों मानी गई?
अनुच्छेद 304(a) राज्य को दूसरे राज्यों से आए माल पर कर लगाने की अनुमति देता है, लेकिन समान स्थानीय माल के साथ भेदभाव नहीं करने की शर्त लगाता है। स्थानीय माल को विशेष छूट देना इस शर्त के विरुद्ध था।
इस फैसले का अनुच्छेद 301 से क्या संबंध है?
अनुच्छेद 301 भारत के पूरे क्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा है। कर-छूट के ज़रिए स्थानीय माल को अनुचित लाभ देना अंतर-राज्यीय व्यापार पर राजकोषीय बाधा बना सकता है, इसलिए फैसला अनुच्छेद 301 की भावना को मजबूत करता है।
RAS और UPSC की तैयारी में यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह केस संघीय ढांचे, राज्य कराधान की सीमाओं, भारत के साझा बाजार और भाग XIII के अनुच्छेद 301 से 304 को लागू करके समझने में मदद करता है। परीक्षा के दृष्टिकोण से यह समझना जरूरी है कि राज्य कर नीति बना सकते हैं, लेकिन समान माल के साथ भेदभाव नहीं कर सकते।