संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने लगभग 19 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के लिए नई दिल्ली का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा स्थापित करने के लिए आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस ढाँचे में चार महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं: आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग। इस यात्रा ने 2022 में स्थापित भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित किया। यह साझेदारी तेज़ी से बढ़ी है और अब इसमें व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना तथा रक्षा भी शामिल हैं। भारत-संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा और संयुक्त अरब अमीरात भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रमुख स्रोतों में से एक है। रक्षा क्षेत्र से जुड़ा यह आशय-पत्र दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय का संकेत देता है, जिसमें वे खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझा करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। फारस की खाड़ी भारत के लिए ऊर्जा का स्रोत, भारतीय प्रवासियों का प्रमुख गंतव्य—जहाँ 35 लाख भारतीय रहते हैं—और एक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है; इसलिए संयुक्त अरब अमीरात भारत का अपरिहार्य साझेदार है। यह समझौता खाड़ी क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है और प्रधानमंत्री मोदी की 'एक्ट वेस्ट' नीति को बल देता है, जो स्थापित 'एक्ट ईस्ट' नीति की पूरक है।
भारत-UAE रणनीतिक रक्षा साझेदारी और गहरी हुई: शेख मोहम्मद बिन जायद नई दिल्ली में, दोनों देशों ने आतंकवाद-रोधी, समुद्री और साइबर सुरक्षा पर आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए
UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने लगभग 19 जनवरी 2026 को उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के लिए नई दिल्ली का दौरा किया, जिसमें दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढाँचा स्थापित करने के लिए आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस ढाँचे में चार महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं: आतंकवाद-विरोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग। भारत-UAE द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा और UAE भारत के प्रमुख FDI स्रोतों में से एक है। रक्षा आशय-पत्र खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने की दिशा में बढ़ने का संकेत देता है। खाड़ी क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हित — ऊर्जा स्रोत, भारतीय प्रवासी (35 लाख भारतीय UAE में) और महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा — UAE को अपरिहार्य साझेदार बनाते हैं। यह समझौता खाड़ी में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति को भी मजबूत करता है।
मुख्य तथ्य
- संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने लगभग 19 जनवरी 2026 को नई दिल्ली का दौरा किया।
- रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा स्थापित करने के लिए आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
- इस ढाँचे में आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल हैं।
- भारत-संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा और संयुक्त अरब अमीरात भारत का प्रमुख निवेश साझेदार है।
- यह समझौता खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझा करने की दिशा में बदलाव का संकेत देता है।
- यह समझौता भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति को मजबूत करता है, जो 'एक्ट ईस्ट' नीति की पूरक है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जनवरी 2026 में शेख मोहम्मद बिन जायद की यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित भारत-संयुक्त अरब अमीरात रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढाँचे पर आशय-पत्र के रणनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
19 जनवरी 2026 को नई-दिल्ली में हस्ताक्षरित आशय-पत्र में आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री-सुरक्षा, साइबर-सुरक्षा एवं रक्षा-औद्योगिक-सहयोग शामिल हैं। 85 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार एवं 35 लाख प्रवासी के साथ यह खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे संयुक्त उत्पादन की ओर बढ़ता है, जो खाड़ी में चीन के प्रभाव के विरुद्ध मोदी की एक्ट-वेस्ट नीति मजबूत करता है।
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भारत-यूएई रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढाँचे पर हुई चर्चाओं में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार का अनुमानित वार्षिक कारोबार लगभग कितना बताया गया?
लेख के अनुसार, भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार लगभग 85 अरब डॉलर वार्षिक है, और यूएई भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के शीर्ष स्रोतों में से एक है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जनवरी 2026 में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की नई दिल्ली यात्रा का मुख्य परिणाम क्या था?
लगभग 19 जनवरी 2026 की इस यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा स्थापित करने के लिए आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस ढाँचे में आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल हैं।
जनवरी 2026 में हस्ताक्षरित भारत-संयुक्त अरब अमीरात रणनीतिक रक्षा साझेदारी ढाँचे के चार आयाम क्या हैं?
रणनीतिक रक्षा साझेदारी के इस ढाँचे में चार महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं: आतंकवाद-रोधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग। रक्षा औद्योगिक सहयोग में संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझा करना भी शामिल है।
भारत-संयुक्त अरब अमीरात के द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत-संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा और संयुक्त अरब अमीरात भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रमुख स्रोतों में से एक है। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है।
भारत-संयुक्त अरब अमीरात रणनीतिक रक्षा साझेदारी भारत की विदेश नीति से कैसे संबंधित है?
यह समझौता भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति को मजबूत करता है, जो स्थापित 'एक्ट ईस्ट' नीति की पूरक है। यह रक्षा क्षेत्र में खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर संयुक्त अरब अमीरात के साथ संयुक्त उत्पादन और प्रौद्योगिकी साझा करने की दिशा में बदलाव का संकेत देता है।
भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति क्या है और संयुक्त अरब अमीरात के साथ साझेदारी इसे कैसे आगे बढ़ाती है?
भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों के साथ संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित है। संयुक्त अरब अमीरात के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और रक्षा उद्योग में सहयोग को संस्थागत रूप देता है और इस नीति को आगे बढ़ाता है।
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