चक्रवात मोंथा बंगाल की दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में बने अवदाब से तेज होकर गंभीर चक्रवाती तूफान बना। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इसे इसी श्रेणी में रखा और आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ते सिस्टम पर नज़र रखी। परीक्षा की दृष्टि से यह विषय मौसम विज्ञान, आपदा प्रबंधन और भारत के पूर्वी तट की भौतिक भूगोल समझने के लिए महत्वपूर्ण है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवात ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और आसपास के तटीय क्षेत्रों में चेतावनी, निकासी और राहत-तंत्र से जुड़े प्रश्नों को समझने में मदद करते हैं। यह अपडेट RAS और UPSC सहित कई परीक्षाओं की प्रीलिम्स तैयारी से जुड़ता है।
मोंथा के मामले में मुख्य तथ्य यह था कि इसका संभावित तट से टकराने का क्षेत्र आंध्र प्रदेश तट पर मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के दक्षिण की ओर बताया गया था। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 28 अक्टूबर 2025 के राष्ट्रीय बुलेटिन में सिस्टम को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में, आंध्र प्रदेश और यनम तटों के पास बताया गया और अगले 2 घंटों में 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम सतत हवा तथा 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक के झोंकों के साथ तट पार करने की संभावना दी गई।
स्टैटिक जीके लिंक के लिए विद्यार्थी को उष्णकटिबंधीय चक्रवात, निम्न दाब, अवदाब, चक्रवात की श्रेणियां, डॉप्लर मौसम रडार, तटीय आपदा प्रबंधन और बंगाल की खाड़ी की चक्रवात-प्रवणता पढ़नी चाहिए। प्रीलिम्स में स्थान, श्रेणी, संस्था और तटीय राज्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में चेतावनी प्रणाली, तटीय आबादी की सुरक्षा, जलवायु जोखिम और आपदा-तैयारी पर छोटे विश्लेषणात्मक उत्तर बन सकते हैं।
