प्रकाशित: 7 अक्टूबर 2025Patrikaविज्ञान-प्रौद्योगिकी
उदयपुर ने फतेहपुरा चौराहे पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली का पायलट शुरू किया
उदयपुर ने अक्टूबर 2025 की शुरुआत में यातायात प्रबंधन सुधारने और भीड़भाड़ कम करने के लिए व्यस्त फतेहपुरा चौराहे पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से चलने वाली ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली का पायलट शुरू किया। इस प्रणाली में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और स्मार्ट सेंसर लगे हैं। पायलट की लागत प्रति चौराहा लगभग ₹10 लाख है।
एआई प्रणाली हर लेन में उसी समय मौजूद वाहनों की संख्या के आधार पर अपने-आप सिग्नल का समय तय करती है। यह भीड़भाड़ वाली लेन को हरी बत्ती देती है और एम्बुलेंस व दमकल गाड़ियों के सायरन पहचानकर तुरंत रास्ता खाली कराती है। इससे उदयपुर एआई आधारित यातायात प्रबंधन अपनाने वाले राजस्थान के शुरुआती शहरों में शामिल हो गया है। सफल पायलट के बाद इस प्रणाली को और चौराहों तक बढ़ाने की योजना है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: राजस्थान में शहरी यातायात के लिए उदयपुर के फतेहपुरा चौराहे पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली ट्रैफिक सिग्नल पायलट परियोजना के महत्व की जाँच कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
अक्टूबर 2025 की शुरुआत में शुरू हुए फतेहपुरा पायलट में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और स्मार्ट सेंसर लगे हैं तथा इसकी लागत प्रति चौराहा लगभग ₹10 लाख है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाहनों की मौजूदा संख्या के आधार पर अपने-आप सिग्नल का समय तय करती है और एम्बुलेंस व दमकल गाड़ियों के सायरन पहचानकर रास्ता खाली कराती है। इससे उदयपुर राजस्थान में एआई आधारित यातायात प्रबंधन अपनाने वाले शुरुआती शहरों में शामिल हुआ है।
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उदयपुर की कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित यातायात प्रणाली में आपातकालीन वाहनों के लिए कौन-सी विशेष सुविधा है?
व्याख्या · सही उत्तर AAI प्रणाली एम्बुलेंस और दमकल के सायरन पहचानकर तुरंत हरी बत्ती देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फतेहपुरा में उदयपुर की एआई ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली क्या है?
उदयपुर ने **अक्टूबर 2025** में फतेहपुरा चौराहे पर पायलट परियोजना के रूप में **कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली** शुरू की। यह **उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और स्मार्ट सेंसरों** से मिली वाहनों की मौजूदा संख्या के आधार पर अपने-आप सिग्नल का समय तय करती है।
उदयपुर की एआई ट्रैफिक प्रणाली आपातकालीन वाहनों की कैसे मदद करती है?
उदयपुर की एआई ट्रैफिक प्रणाली **एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियों** के **सायरन** पहचानकर उनके लिए तुरंत रास्ता खाली कराती है। इस तरह आपातकालीन वाहनों को बिना किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप के प्राथमिकता मिलती है।
उदयपुर की एआई ट्रैफिक सिग्नल पायलट परियोजना की लागत क्या है?
पायलट की लागत प्रति चौराहा लगभग **₹10 लाख** है। उदयपुर एआई आधारित यातायात प्रबंधन अपनाने वाले राजस्थान के शुरुआती शहरों में से एक है।
क्या उदयपुर एआई ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली का विस्तार करने की योजना बना रहा है?
हाँ, फतेहपुरा में सफल पायलट के बाद उदयपुर इस **एआई ट्रैफिक सिग्नल प्रणाली** को और चौराहों तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। यह शहर राजस्थान में एआई आधारित यातायात प्रबंधन अपनाने वाले शुरुआती शहरों में शामिल है।
उदयपुर की एआई ट्रैफिक प्रणाली में कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होती है?
उदयपुर की इस प्रणाली में **उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे**, **स्मार्ट सेंसर** और एआई एल्गोरिदम हैं। ये उसी समय मौजूद **वाहनों की संख्या** का विश्लेषण करके सिग्नल का समय अपने-आप बदलते हैं और आपातकालीन वाहनों के लिए प्राथमिकता से रास्ता खाली कराते हैं।