केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी 2025-26 के लिए फॉस्फेटिक और पोटैशिक उर्वरकों पर पोषक-आधारित सब्सिडी दरों को मंजूरी दी है। इस फैसले का बजटीय प्रावधान लगभग ₹37,952 करोड़ है। रबी 2024 की ₹24,475.53 करोड़ जरूरत की तुलना में यह वृद्धि लगभग 55.06% बनती है, इसलिए इसे करीब 55% की बढ़ोतरी कहा गया है।

यह फैसला 01.10.2025 से 31.03.2026 तक लागू रबी सीजन से जुड़ा है। इसके दायरे में डीएपी और एनपीकेएस ग्रेड सहित फॉस्फेटिक और पोटैशिक उर्वरक आते हैं। सरकार की व्यवस्था के तहत सब्सिडी उर्वरक कंपनियों को स्वीकृत और अधिसूचित दरों पर दी जाती है, ताकि किसानों को ये उर्वरक किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो सकें। ये दरें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उर्वरक बाजार तथा यूरिया, डीएपी, एमओपी और सल्फर जैसे कच्चे माल की कीमतों के रुझान को देखते हुए मंजूर की गईं।

परीक्षा में इस फैसले को खेती की लागत, सब्सिडी बोझ, राजकोषीय प्रबंधन और किसानों की लागत के संदर्भ में पढ़ना उपयोगी है। शासन के हिस्से में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, रसायन और उर्वरक मंत्रालय की योजना व्यवस्था, तथा उर्वरक कंपनियों के ज़रिए लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया समझनी होती है। स्टैटिक जीके में पोषक-आधारित सब्सिडी योजना की बुनियादी बात याद रखें: यह योजना 01.04.2010 से लागू है और उर्वरकों में मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सल्फर जैसे पोषक तत्वों के आधार पर सब्सिडी तय करती है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे प्रीलिम्स में योजना-तथ्य और मुख्य परीक्षा में कृषि नीति, किसान कल्याण और सब्सिडी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर प्रश्न बन सकते हैं।