प्रकाशित: 20 सितंबर 2025DD Newsअंतरराष्ट्रीय
भारत और नॉर्वे ने पहला समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण एवं अप्रसार संवाद आयोजित किया
भारत और नॉर्वे ने ओस्लो, नॉर्वे में समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण और अप्रसार पर पहला संवाद आयोजित किया। संवाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने पर केंद्रित था और दोनों पक्षों ने अवैध समुद्री गतिविधियों के खिलाफ प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई।
वार्ता में नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता, समुद्री आतंकवाद और समुद्री डकैती से निपटना, और परमाणु अप्रसार शामिल थे। एक प्रमुख आर्कटिक शिपिंग देश और NATO सदस्य के रूप में नॉर्वे भी भारत की तरह खुले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था में रुचि रखता है। यह संवाद हिंद-प्रशांत रणनीति के हिस्से के रूप में नॉर्डिक देशों के साथ भारत की संलग्नता को मजबूत करता है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत एवं नॉर्वे ने ओस्लो में पहला समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण एवं अप्रसार संवाद आयोजित किया। रणनीतिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारत एवं नॉर्वे ने ओस्लो में पहला समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण एवं अप्रसार संवाद आयोजित किया। वार्ता में नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री क्षेत्र की निगरानी, समुद्री डकैती और आतंकवाद से मुकाबला तथा परमाणु अप्रसार जैसे मुद्दे शामिल रहे। दोनों पक्षों ने अवैध गतिविधियों के विरुद्ध प्रयास सुदृढ़ करने पर सहमति दी। आर्कटिक राष्ट्र और नाटो सदस्य नॉर्वे, भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति को मजबूती देता है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
भारत और नॉर्वे ने सितंबर 2025 में किन साझा विषयों पर अपना पहला संवाद आयोजित किया?
व्याख्या · सही उत्तर Bभारत और नॉर्वे ने ओस्लो में अपना पहला समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण और अप्रसार संवाद आयोजित किया। वार्ता में नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री डकैती और समुद्री आतंकवाद का मुकाबला, और परमाणु अप्रसार शामिल थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में आयोजित पहली भारत-नॉर्वे समुद्री सुरक्षा वार्ता क्या है?
भारत और नॉर्वे ने ओस्लो, नॉर्वे में समुद्री सुरक्षा, निरस्त्रीकरण और अप्रसार पर अपनी पहली द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की।
भारत-नॉर्वे समुद्री सुरक्षा वार्ता में कौन से विषय शामिल हैं?
इस वार्ता में सुरक्षित समुद्री वातावरण, अंतरराष्ट्रीय कानून, नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री क्षेत्र के बारे में जागरूकता, समुद्री डकैती और समुद्री आतंकवाद से मुकाबला, निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार जैसे विषय शामिल थे।
भारत-नॉर्वे द्विपक्षीय समुद्री सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
नॉर्वे एक प्रमुख समुद्री और आर्कटिक देश है। भारत के साथ उसका सहयोग समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की रक्षा और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करता है।
भारत-प्रशांत में भारत की व्यापक समुद्री सुरक्षा रणनीति क्या है?
भारत समुद्री साझेदारियों, नियम-आधारित व्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग से हिंद-प्रशांत में सुरक्षित, खुला और स्थिर समुद्री वातावरण बनाए रखने पर जोर देता है।
भारत-नॉर्वे वार्ता भारत की अप्रसार प्रतिबद्धताओं को कैसे मजबूत करती है?
निरस्त्रीकरण और अप्रसार पर चर्चा भारत को समान विचार वाले साझेदारों के साथ बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक अप्रसार मानकों पर समन्वय का अवसर देती है।