13 मार्च 2026 को प्रकाशित इस समसामयिकी अपडेट में बताया गया है कि एनएचएआई ने पहला राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक जारी किया है। यह सूचकांक ISRO के उपग्रह डेटा का उपयोग करके पूरे भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्ष आवरण को मापता है। विषय छोटा है, पर परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी, भारतीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय निगरानी और अवसंरचना शासन के बीच जुड़ाव दिखाता है।

प्रीलिम्स के लिए मुख्य तथ्य यह है कि सूचकांक जारी करने वाली संस्था एनएचएआई है और डेटा का आधार ISRO उपग्रह डेटा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों पर हरित आवरण की स्थिति मापना, वनीकरण की प्रगति की निगरानी करना और पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी में मदद करना है। इसलिए प्रश्न संस्था, सूचकांक, डेटा-स्रोत और उद्देश्य को सीधे जोड़कर पूछा जा सकता है।

मेन्स के लिए इसका महत्व शासन और सतत विकास के नज़रिए से है। सड़क अवसंरचना केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहती; राजमार्ग गलियारों पर पर्यावरणीय अनुपालन और वनीकरण की निगरानी भी प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा बनती है। उपग्रह डेटा के उपयोग से बड़ी भौगोलिक लंबाई पर हरित आवरण का आकलन एक समान ढंग से किया जा सकता है। यह स्टैटिक जीके में राष्ट्रीय राजमार्ग, रिमोट सेंसिंग, पर्यावरणीय निगरानी और सार्वजनिक अवसंरचना शासन से जुड़ता है। RAS और UPSC जैसे पेपरों में इसे प्रीलिम्स के तथ्यात्मक प्रश्न और मुख्य परीक्षा के शासन/पर्यावरण आयाम, दोनों में जोड़ा जा सकता है।